मंगलवार, 30 अगस्त 2011

अमेरिका ने ली कई जानें:काला चेहरा

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा 
अमरीका में राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से हाल ही में नियुक्त एक आयोग ने कहा है कि 1940 के दशक में ग्वाटेमाला में यौन संक्रमित रोगों के साथ शोध के क्रम में कम से कम ८३ लोगों की मौत हुई. इन लोगों को जान-बूझकर सिफ़लिस और गोनोरिया जैसे यौन रोगों से संक्रमित किया गया.ये आयोग ग्वाटेमाला में अमरीकी वैज्ञानिकों के काम और उनके द्वारा १९४६ से १९४८ तक यहाँ के नागरिकों पर किये गए परीक्षणों की जाँच कर रहा है. अमरीका ने इन शोधों के लिए ग्वाटेमाला से पिछले साल ही माफ़ी मांगी थी. आयोग ने कहा है कि इस शोध के क्रम में वैज्ञानिकों ने पेन्सिलिन ड्रग की जाँच के लिए वहाँ की अति संवेदनशील आबादी को जानबूझ कर संक्रमित किया. अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि इस संक्रमण से सीधे तौर पर कितनी मौतें हुईं. ये शोध अमरीकी जन स्वास्थ्य सेवा की ओर से वर्ष 1946 और 1948 के बीच किये गए थे. पेन्सिलिन के प्रभाव की जाँच के लिए अमरीकी वैज्ञानिकों ने ग्वाटेमाला के क़ैदियों, मानसिक रोगियों और अनाथों को इन यौन रोगों से संक्रमित किया गया था. शोध के बारे में इन लोगों से कोई सहमति नहीं ली गई थी और संक्रमण के बाद भी ये बात छिपाई गयी थी. ये काम काफ़ी गोपनीय तरीक़े से हुआ. इस मामले की जाँच कर रहे आयोग के कुछ सदस्यों ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन बताया है. इससे मानवाधिकारों के प्रति अमेरिका का छद्म चेहरा भी सामने आता है. आयोग की पूरी रिपोर्ट सितंबर के शुरू में प्रकाशित होगी.
(आशुतोष पाण्डेय)

1 टिप्पणी:

वन्दना ने कहा…

आजकल ऐसा ही होता है परदे की आड मे ।