कल कुछ लोग प्यार करेंगें! प्यार का इजहार करेंगें! और कुछ इन प्यार करने वालों की खिलाफत. पहली बार एक व्यापक आन्दोलन भी शुरू होगा प्यार करने वालों के लिए.. लव धर्मा नाम से एक संस्था पहली बार प्रेम और सेक्स की सर्वमान्यता पर एक आन्दोलन करने जा रही है. इस देश में प्रेम को खाप की नजरों से ही देखा जाता है लेकिन आज इस बदलते समय में तो हमको बदलना ही होगा. प्यार को परिभाषित या कहें तो स्वीकार्य बनाना ही होगा. हर इंसान के अन्दर प्रेम और सेक्स की प्रवृति होती है और ये ही कारण है की हम एक व्यापक सृष्टि को देखतें हैं. इस सच के बाद भी प्यार और सेक्स को लेकर कहीं ना कहीं एक विरोध दिखता है. आज प्यार एक कुंठा के रूप में जन्म ले रहा है, आप देख सकते हैं की दिल्ली के तमाम पार्कों में अश्लीलता की हद से भी ज्यादा काफी कुछ दिखता है. समाज की मान्यता ना मिलने के कारण ये सब काफी संक्रमित स्थिति में दिख रहा है. समाज, स्कूल, कालेज जहां इस प्यार की शुरूआत होती है वहीं इस प्यार पर पाबंदियां हैं. बजाय पाबंदी के इसे प्रोत्साहित किया जाय, प्यार करना जुर्म ना हो... प्यार के इजहार में आनर किलिंग की धमकी ना हो तो ये प्यार सही दिशा में जाएगा. प्यार के अलावा सेक्स को तो और भी गंदी मानसिकता के साथ देखा जाता है, लेकिन जो सेक्स समस्त सृष्टि का कारक है उसे लेकर इतना हल्ला क्यों? कुछ या कहें
ज्यादातर लोग जो कभी ना कभी सेक्स की क्रियाओं में लिप्त रहतें हैं उन्हें दूसरों की लिप्तता पर बैचेनी क्यों होती है. इस प्रश्न पर एक महानुभाव का सवाल था पार्कों में जो हो रहा है, दिख रहा है क्या वह सब ठीक है? उनका ये सवाल काफी अटपटा था... मैंने कहा की क्या आप इन बच्चों को घर में प्यार करने का मौक़ा देंगें तो वे उबल गये और काफी खरी-खोटी सुना निकल गये. ऐसे ही एक कृष्ण भक्त मिले जो कृष्ण की रास लीला के दीवाने थे एक दिन अपनी बिटिया को किसी लडके के साथ काफी पीते देख लिया तो आपा खो बैठे पहले बिटिया की ठुकाई और फिर लडके के घर जा उसे देख लेने की धमकी देकर आये. जब हमने उनके बारे में जाना तो पता चला की 20 साल पहले उन्होंने खुद लव मैरिज की थी. जो चीज 20 साल पहले ठीक थी आज गलत हो गयी कैसे?











.jpg)








अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने से लेकर जनता के बीच में इस सन्देश को पहुचाने में भी मोदी सफल रहें हैं की मोदी गुजरात की जरूरत हैं अगर मोदी नहीं रहेंगे तो गुजरात में हिन्दू बेमौत मारा जाएगा. लेकिन अपने सियासी फायदे के लिए बजरंगी और कोदनानी को फांसी की सिफारिश करने से भी मोदी को गुरेज नहीं दिखता है, भाड़ में जाए हिन्दू वाली तर्ज में हिन्दू नेताओं को फांसी की मांग करने वाले मोदी को कुछ लोग हिन्दू धर्म के लिए मसीहा के रूप में स्थापित करने की कोशिश में हैं. आडवानी को जिस तरह मोदी ने चित्त किया उससे ये सन्देश ही गया की जो मोदी पूजा नहीं करेगा उसे या तो चुप कर दिया जाएगा या फिर ठिकाने लगाने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा. भाजपा मोदी को लेकर जितनी उत्साहित दिख रही है, उसका कोई कारण नहीं दिखता है. कुछ लोगों के सोचने से कोई प्रधानमंत्री नहीं बन जाता है और भाजपा के समर्थक तो मोदी को प्रधानमंत्री बना चुके हैं उन्हें इतना सब्र नहीं की चुनावों का इन्तजार करें. वैसे भाजपा और उसके समर्थक कब किस के तारों को आसमान से जमीनों-जद कर दें कहना मुश्किल हैं. ये वह ही लोग हैं जो कभी आधी रोटी खायेंगें मंदिर वहीं बनायेंगें का नारा देते थे लेकिन सत्ता के बाद एक बार उस और झांका तक नहीं हाँ अटल जी ने पाकिस्तानी पार्टी खूब उडाई और पाकिस्तान ने कारगिल से मार की. अब देखना ये है की मोदी कब तक प्रधानमंत्री बने रहते हैं, चुनाव के बाद तो जनता का फैसला ही मानना पडेगा तब तक मोदी हमारे प्रधानमंत्री. 