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| धर्मेन्द्र: एक जीवंत प्रेरणा |
(क्या आप को भी ऐसे शिक्षक चाहिए?कल एक केन्द्रीय विद्यालय से रिटायर्ड प्रधानाचार्य मिले, उनकी एक अजीब अनुनय थी पाण्डेय जी मैंने आज तक कोई भ्रष्टाचार नहीं किया बड़े ईमानदारी से नौकरी की अब आपसे एक विनती है कहीं अपने सम्बन्धों का प्रयोग कर मेरे बेटे को जिसने केन्द्रीय विद्यालय पी जी टी (इतिहास) का पेपर दिया है पास करवा दो... जितना भी लेना देना पड़े कोई बात नहीं.
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| एस जी नाथन: खूबसूरत जिन्दगी |
दूसरे मित्र का उल्लेख भी उनके नाम के साथ करूंगा. एस जी नाथन एक आम लेकिन ख़ास शख्शियत का आदमी जिसके लिए जिन्दगी में मूल्यों का विशेष मूल्य है. जब भी जो किया उस ईश की कृपा मान कर किया और जीवन के हर पल को खूबसूरत बना दिया. इसके साथ एक बड़ा नाम जिसका उल्लेख में कर रहा हूँ एक योगी का है जिसे कर्मयोगी कहूं या फिर एक इंसान (क्योंकि आज करोड़ों की भीड़ में सब मिलते हैं सिवा इंसान के) धर्मेन्द्र कुमार सिंह इस चेहरे पर जो शांत और निश्चल मुस्कान खिली होती है वो जो कहती है वह वास्तव में सम्मोहित करने वाली है. यूपी के कानपुर में साह्वेस के नाम से एक प्राकृतिक आन्दोलन जिसमें अनन्य भक्ति के साथ कई लोगों को जीवन प्रेरणा देकर उन्हें इंसान बना देना ये एक छोटा काम नहीं है. इन सब लोगों से घिरा क्या महसूस करता हूँ क्या कहूं? जब सबसे पहले वाले प्रधानाचार्य मिलते हैं तो लगता है धन ही जीवन है और जब नाथन या धर्मेन्द्र से मुखातिब होता हूँ तो लगता है एक जीवन सुधार दूंगा तो तमाम सम्पत्ति मिल जायेगी. सच कहूं तो उन प्रधानाचार्य के चेहरे पर चिंता चिता बन सुलग रही थी लेकिन ये दो लोग खुल कर मुस्कराते हैं इनके हाथ खुले होते हैं और ऊपर वाला भी इन पर नियामत लुटाता है. बस कोशिश करें की हम भी इन दो जैसे हाथों को फैला सारे जहां को समा लें...
मेरे दोस्त धर्मेन्द्र और नाथन को... शब्द खत्म हो जाते हैं सिर्फ दुआएं निकलती हैं.








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अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने से लेकर जनता के बीच में इस सन्देश को पहुचाने में भी मोदी सफल रहें हैं की मोदी गुजरात की जरूरत हैं अगर मोदी नहीं रहेंगे तो गुजरात में हिन्दू बेमौत मारा जाएगा. लेकिन अपने सियासी फायदे के लिए बजरंगी और कोदनानी को फांसी की सिफारिश करने से भी मोदी को गुरेज नहीं दिखता है, भाड़ में जाए हिन्दू वाली तर्ज में हिन्दू नेताओं को फांसी की मांग करने वाले मोदी को कुछ लोग हिन्दू धर्म के लिए मसीहा के रूप में स्थापित करने की कोशिश में हैं. आडवानी को जिस तरह मोदी ने चित्त किया उससे ये सन्देश ही गया की जो मोदी पूजा नहीं करेगा उसे या तो चुप कर दिया जाएगा या फिर ठिकाने लगाने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा. भाजपा मोदी को लेकर जितनी उत्साहित दिख रही है, उसका कोई कारण नहीं दिखता है. कुछ लोगों के सोचने से कोई प्रधानमंत्री नहीं बन जाता है और भाजपा के समर्थक तो मोदी को प्रधानमंत्री बना चुके हैं उन्हें इतना सब्र नहीं की चुनावों का इन्तजार करें. वैसे भाजपा और उसके समर्थक कब किस के तारों को आसमान से जमीनों-जद कर दें कहना मुश्किल हैं. ये वह ही लोग हैं जो कभी आधी रोटी खायेंगें मंदिर वहीं बनायेंगें का नारा देते थे लेकिन सत्ता के बाद एक बार उस और झांका तक नहीं हाँ अटल जी ने पाकिस्तानी पार्टी खूब उडाई और पाकिस्तान ने कारगिल से मार की. अब देखना ये है की मोदी कब तक प्रधानमंत्री बने रहते हैं, चुनाव के बाद तो जनता का फैसला ही मानना पडेगा तब तक मोदी हमारे प्रधानमंत्री. 
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