सोमवार, 6 जून 2011

ये आन्दोलन सेलिब्रिटी के साथ

आज देश भारी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, जहां केंद्र और राज्य सरकारें घोटालों में लिप्त हैं और देश का बुद्धिजीवी वर्ग आन्दोलनों में व्यस्त है, भ्रष्टाचार का भूत देश की गर्दन पर सवार है, पंचायत से लेकर संसद और प्रधानमंत्री तक सभी की कहीं ना कहीं मौन स्वीकृति है इस सब को. केंद्र सरकार इस दुनिया की सबसे भ्रष्ट सरकार है, लेकिन जनता है की मानती ही नहीं, कलमाडी, ए. राजा को जेल जाना पड़ा है. लेकिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री को तो भा ज पा हाईकमान तमाम सबूतों के बाद भी दोषी नहीं मान रहा है, अब बात ब.स.पा. की खुद मायावती के खिलाफ दर्जनों भ्रष्टाचार के आरोप हैं, पश्चिमी बंगाल की सरकार जिसे तीन दशकों से जनता का वरदहस्त था, यू. पी.ए. समर्थित और केंद्र सरकार में रेलवे मंत्री ममता बनर्जी के सामने ढह गयी. अब फिर रामदेव ने काले धन को लेकर सरकार पर हल्ला बोला तो जनता फिर उद्वेलित हुयी, लाखों लोग सारे देश में रामदेव के साथ आये, लेकिन रामदेव तो अनशन में बैठने से पहले ही सरकार से एक डील कर चुके थे, भले ही बाद में वो कहें की ये सब जबरदस्ती लिखवाया था, जब आप के साथ जबरदस्ती हुयी तो आपने जनता के पास आ इसका खुलासा क्यों नही किया? लेकिन वे इसका जवाब क्यों दें क्योंकि ये सवाल कोई पूछे तब ना, इस देश में तमाशाई बहुतेरे हैं, किसी भी जलसे या रैली में लाखों की भीड़ यूं ही इकठ्ठी हो जाती है, और इसमें अधिकतर चेहरे तो हर जगह पाए जातें हैं, रामदेव ने भी बुलाया लोग चले आये, सब मानते हैं की आन्दोलन हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है, लेकिन क्या ये सब लोग तब भी जातें हैं जब इनके बगल में भ्रष्टाचार होता है, किसी की इज्जत लुटी जाती है, इस देश की जनता को आन्दोलन करने के लिए सेलिब्रेटी चाहिए, चाहे वो राहुल गाँधी हों, अन्ना हों, रामदेव या फिर कोई और कुछ ख़ास असर नहीं बस आन्दोलन होना चाहिए, चाहे वो दिल्ली का रामलीला मैदान में हो या फिर किसी नेशनल हाईवे को जाम कर किया जाये, अब बात करें अपनी दिल्ली की ये दिल्ली भी ना, सब यही होगा कामनवेल्थ से लेकर धरना तक, और आज कल दिल्ली में एक नया समाज बना है फेसबुकिया समाज, अरे भाई इस समाज के पास विचारों का भण्डार है.. और अपना रूतबा दिखने का शौक भी, बस शुरू हो जाता है ये समाज अपने विचार गढ़ने, हर मुद्दे पर पर अपनी वेबाक राय देने के लिए तो अब ये विख्यात हो गया है, ये फेसबुकिये भी ना किसी भी सेलिब्रिटी के साथ खुद का नाम जोड़ने के लिए बेताब है पहले अन्ना के साथ फोटो अपलोड किये, अब नया बुखार रामदेव का चढ़ गया, ४-५ जून को सरकार ने रामदेव को हटाने के लिए जो किया उसे जलियावाला कह डाला सबने. सरकार ने जो किया वह तो अशोभनीय है और रहेगा भी, लेकिन यदि रामदेव ने सरकार के द्वारा किये गये धोखे को जनता के सामने रख दिया होता तो शायद ये हालात नहीं आते और सरकार की अच्छी फजीहत भी होती, खेल तो रामदेव ने भी खेला. बस जनता अभी समझी नहीं है, सत्याग्रह के लिए आर.एस.एस का साथ, क्या गांधी के देश में ये होना चाहिए था? हाँ गाँधी को मरे तो साल हो गए वो कौन सा सेलिब्रेटी हैं, जो जनता रामदेव से ये पूछती. जिस झूठ को छिपा रामदेव सत्याग्रह के लिए आये वो झूठ तो किसी को दिखता ही नहीं, क्या ये भ्रष्ट आचरण नहीं था? ए राजा और कलमाडी को तो जेल भेजा गया और रामदेव को चार्टर्ड विमान से उनके आश्रम में छोड़ा गया. ये सरकार केंद्र वाली वास्तव में भ्रष्ट है, तभी तो भ्रष्ट काम के लिए किसी को जेल तो किसी को बाकायदा विमान की सेवा.
देश में अस्थिरता ना हो इसके लिए सरकार के चार-चार मंत्री रामदेव के पास गए, रामदेव ने कहा भी की उनकी मांगें मान ली गयी हैं बस इस बात से भा ज पा नाराज हो गयी होगी और रामदेव को सरकार के साथ किया करार तोड़ना पड़ा. ये भ्रष्ट सरकार है जो हर बेईमान के साथ करार कर लेती है. कामन वेल्थ घोटाला देखो कितने बेईमानों को ठेका दिया. अब सरकार को चाहिए की एक सेंसर तैयार करवाए जो बेमानों को देखते ही बोलने लगे मेटल डिटेक्टर की तरह करप्सन डिटेक्टर, हमारे आई आई टी के छात्रों से लेकिन वहां भी समस्या, जयराम का कहना है की वो विश्वस्तरीय नहीं हैं. अब ऐसा करते हैं जहां सब एक मत हैं किसी को कोई परेशानी नहीं वहा की बात करें अरे कुछ दिन पहले मुन्नी बदनाम हुयी और कई अवार्ड ले गयी, अब सरकार बदनाम हो रही है, शीला भी तो जवान हुयी थी, वो भी हिट थी अब भ्रष्टाचार जवान है तो... हल्ला मच गया. चलिए सब हो गया अब देश की सोचतें हैं, ये देश हमारा है, ये ना रामदेव से सुधरेगा ना इस सरकार से बिगड़ेगा, इसे सुधारना और बिगाड़ना हमारे हाथों में है, कुछ करो इस देश के लिए, फेसबुक पर पोस्ट कर सेलिब्रिटी बनाना बंद करो.
(आशुतोष पाण्डेय)

शनिवार, 4 जून 2011

एक नया शगूफा है रामदेव का अनशन

भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार .... ये इस देश की नियति बन गया लगता है... सब इसकी अंगीठी पर अपने हाथ सेक रहें हैं, कोई लोकपाल की मांग करता है तो दूसरा ये पूछ लेता है की क्या गारंटी है की लोकपाल ईमानदार ही होगा? कोई काले धन को लेकर आंदोलित है. ख़ास बात है की ये सब जनता का साथ मांग रहें हैं. अन्ना हजारे के अनशन के बाद लोकपाल पर एक समिति का गठन तो कर दिया गया लेकिन गठन के समय से ही ये एक विवाद का कारण बन गयी थी, पहले भूषण परिवार को लेकर फिर प्रधानमंत्री और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को इस के प्रभाव से बाहर रखने के कारण खासा विवाद है, सरकार और अन्ना के समर्थकों के बीच एक मल्ल युद्ध जारी है, ६ जून को इसका जिन्न बाहर आने वाला है, खैर आज का बड़ा मुद्दा किसी समय योग गुरु रहे रामदेव बाबा का आज ४ जून से शुरू होने वाला अनशन है, रामदेव की मांगें तो बहुत हैं लेकिन सबसे बड़ी मांग में शामिल है, विदेशी बैंकों में रखा काला धन की वापसी. सरकार के मंत्री तो बाकायदा एयर पोर्ट पर भी रामदेव की वन्दना कर चुकें हैं, पर रामदेव हैं की मान ही नहीं रहें हैं, अब एक करोड़ लोगों के साथ अनशन में बैठने की चेतावनी दें, उन्होंने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. अब एक नया मोड़ देखें कल केन्द्रीय मंत्रियों के साथ हुयी एक बैठक का हवाला  देते हुए रामदेव ने कहा था "काफी मुद्दों पर सहमति हो गयी है है, सरकार काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने पर राजी तो हो गयी है, लेकिन ऐसा कोई विधेयक लाने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है". रामदेव जी ये क्या आपका ये बयान आपके समझ में आया, सरकार क्या करेगी क्या नहीं ये तो बाद में पता चलेगा लेकिन एक सवाल ये काला धन कहाँ है, कितना है, इस पर भी आप के पास सिवाय कयास के कुछ नहीं है, और क्या ये इतना आसान होगा, जिन देशों के बैंकों में ये पैसा है क्या वो इसे आसानी से वापस कर देंगे? और क्या अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों में ये प्राविधान हैं? क्या दुनिया भर के पैसों को जमा करने वाले इसकी जानकारियाँ देकर अपनी साख गिरायेंगें ऐसा तो लगता नहीं हैं. हाँ सरकार इसके लिए प्रयास भर जरुर कर सकती है और करने भी चाहिए. दरअसल अगर सच कहा जाए, आम आदमी भी इस मुहिम में मात्र साथ भर देने को जुड़ा है. इस देश में कितने लोग हैं जो अपना असल टैक्स जमा करतें हैं, कितने हैं जो सरकारी सुविधाओं की धज्जियां नहीं उडातें हैं, कितने प्रतिशत लोग हैं जो अपराधियों को वोट नहीं देतें है, आज अगर ख़ास लोगों पर शिकंजा कसेगा तो उनका कानूनी पलटवार आम जनता पर ही होगा... फिर तो सब भ्रष्टाचारियों को सजा मिले जो ख़ास है आम हैं, जो संसद के चुने नुमायंदे हैं या फर्जी बी पी एल कार्ड बनवाने वाले तथाकथित गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोग, मान लिया राजनेता अनैतिक हैं, तो जनता उन्हें वोट क्यों दे रही है? तमिलनाडु में जयललिता के दामन पर तमाम दाग रहें हैं, पश्चिमी बंगाल में  ममता की ताजपोशी जो की अब तक की दुनिया की सबसे भ्रष्ट सरकार का हिस्सा है,को बहुमत क्या है? क्या रामदेव या अन्ना जनता की इस मंशा को नहीं जानतें हैं, इतने बड़े आन्दोलन खड़े करने की कुव्वत रखने वाले ये समाजसेवी (इस शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं? ) इतने मासूम तो नहीं हैं? पहले उन एक करोड़ की गारंटी दो बाबा जो आपके साथ अनशन में बैठे हैं, की वे सब ईमानदार हैं. अब भी कुछ बुद्धिजीवी अपनी फोटो खिचवाने जरुर जायेंगें, फिर अखबारों की कटिंग, टी वी बाइट्स सब का रिकार्ड रखेंगें. कुछ अन्ना के साथ चमके, कुछ बाबा के साथ भी चमक जायेंगें.... कुछ तो दो तीन दिन पहले से ही सुपर रिन की चमकार से सराबोर हैं,  लेकिन ये मुआ भ्रष्टाचार बढ़ता ही जाएगा जब तक इस देश का आम आदमी ना सुधर जाए और वो ना सुधरने वाला. अगर वास्तव में इस देश से भ्रष्टाचार मिटाना है तो एक क़ानून बने की है व्यक्ति प्रतिदिन देश के लिए एक घंटे से तीन घंटा अनिवार्य शारिरीक, मानसिक योगदान करे इसमें आम से लेकर प्रधानमंत्री तक को शामिल किया जाय, हर व्यक्ति को आर्मी में सेवा करना अनिवार्य कर दिया जाय कितने समाज सेवी इसके लिए तैयार हैं? ये सवाल है उन लोगों से जो देश को अनशन, धरनों, जलूसों से अस्थिर कर रहें हैं. इतनी देर देश के विकास के लिए काम करो फिर देखो ६ माह में इस देश की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल जायेगी.

(आशुतोष पाण्डेय)


शुक्रवार, 27 मई 2011

वो घिनौना चेहरा आपका ही ना हो:फर्जी प्रमाणपत्रों का सच

जहां इस देश के नेता घोटालों में व्यस्त हैं, वहीं आम आदमी भी कहीं पीछे नहीं है, टैक्स की चोरी से लेकर फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिये सरकारी नौकरी पा लेने का खुला खेल भी देश में चल रहा है, अभी एक ताजा मामला उत्तराखंड के नैनीताल जिले का सामने आया है, यहाँ एक अध्यापक ने फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिये पांच साल सरकारी नौकरी कर ली, अब किसी व्यक्ति के द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना मागने पर ये सच सामने आया है की उसकी एम. ए. और बी. एड. की मार्कशीट ही फर्जी थी जिसका कोई रिकार्ड सम्बंधित विश्वविद्यालय के पास था ही नहीं, ये तो वह मामला है जो पकड़ में आ गया, ऐसे हजारों मामले हर साल होतें हैं जिसमें एक संगठित माफिया काफी सधे तरीके से काम करता है, बाकायदा एजेंटों और आफिस बनाकर काम करने वाले इन माफियाओं के  तार विभिन्न बोर्डों के अधिकारियों से लेकर राजनेताओं और पुलिस तक से जुड़ें रहतें हैं, ये माफिया भी दो तरह के हैं एक वो जो पूरे कायदे -कानूनों के अनुसार काम करतें हैं इनकी प्रवेश से लेकर परीक्षाफल आने तक की सारी जिम्मेवारी होती है, इनके पास नक़ल कराने और दुसरे छात्र को बिठा परीक्षा दिलाने तक की व्यस्था होती है. ये हाल किसी एक शहर या बोर्ड का नहीं है, सारे देश इस प्रकार के माफिया खुले आम अपनी बिसात बिछाए घूम रहें हैं, १० वीं से लेकर बी. एड तक कोई भी डिग्री या कोर्स हो ये करवा देतें हैं, इसके लिए ग्राहकों की कोई कमी भी नहीं होती है, दुसरे प्रकार का माफिया वो है जो फर्जी मार्कशीट खुद तैयार करता है और बेचता है इनके द्वारा दिए गए सभी प्रमाण पात्र नकली होतें हैं, फिर भी हजारों लोग हर साल इनकी सेवा लेतें हैं. इस प्रकार के माफिया बोर्ड के लोगो और मुहर की नक़ल कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने में माहिर होतें हैं. समय समय पर इन लोगों की गिरफ्तारियां भी होती हैं लेकिन किसी पुख्ता क़ानून के ना होते ये जल्द ही  बरी हो जातें या जमानत पर आ जातें हैं, सवाल ये नहीं है की ये इतना बड़ा फर्जीवाड़ा करते कैसे हैं असल सवाल तो ये है की आखिर इन्हें काम करवाने वाले मिलते कहाँ से हैं, अभी कुछ दिन पूर्व एक एयर लाइंस के पायलट के पास फर्जी लाइसेंस मिला था. इसके अतिरिक्त फर्जी डोमिसाइल, बी पी एल कार्ड बनाने और बनवाने वालों की कमी नहीं हैं, हर साल फर्जी डोमिसाइल के चलते सैकड़ों छात्रों का प्रवेश निरस्त हो जाता है. फर्जी डाक्टर, फर्जी इंजीनियर से लेकर फर्जी नेता सभी पाए जातें हैं इस दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में. आगे हम आपको सुनायेंगें कुछ दास्तान जिसके चलते आप देखेंगे इस दुनिया का घिनौना चेहरा, लेकिन ध्यान रहे कहीं हमारी अगली मुहिम आपकी दास्तान ना कह रही हो. वो घिनौना चेहरा आपका ही ना हो. 
पड़ताल: (इनसाईट स्टोरी टीम) 
आलेख: आशुतोष पाण्डेय 

अमेरिका पाकिस्तान का समधियाना

हिलेरी क्लिंटन
अमेरिका और पाक का समधियाना किसी के समझ नहीं आता है, एक और जहां अमेरिका कभी खुल कर इस बात को स्वीकार करता है की पाकिस्तान आंतक की शरणस्थली है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति से लेकर विदेश मंत्री तक चाटुकारिता करते नजर आतें हैं, २७ मई २०११ को अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन एक विशेष अनुरोध को लेकर इस्लामाबाद पहुचीं हैं. दो मई को लादेन के मारे जाने के बाद से पाकिस्तान सरकार अमेरिकी कार्रवाई के तौर- तरीकों की निंदा करता रहा है, इसके साथ ही चरमपंथी मुसलमानों का एक गुट भी अमेरिका को परिणाम भुगतने की चेतावनी दे चुका है. अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ पाकिस्तान आये ज्वाइंट चीफ आफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन और अन्य अधिकारी भी इस बात की हामी भर रहें हैं अमेरिका अल-कायदा और अन्य चरमपंथियों से लड़ने को पाकिस्तान की मदद चाहता है. हिलेरी का विशेष अनुरोध क्या होगा पता नहीं, लेकिन अगर विश्लेषकों की मानें तो हिलेरी वहीं पुराना राग अलापेंगी की अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान  का सहयोग चाहता है, इसके अलावा अमेरिका पाकिस्तान से उच्च वर्ग से कर वसूली की दिशा में विशेष कदम  उठाने के लिए कहता रहा है गौरतलब है की अमेरिका हर साल पाकिस्तान को तीन अरब डालर से ज्यादा की वित्तीय मदद देता है. 
हिलेरी की यात्रा से ठीक एक दिन पहले पेंटागन पाकिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या में कमी करने को राजी हो गया था, अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस समय पाकिस्तान में २०० से ज्यादा अमेरिकी सैनिक हैं जो पाकिस्तानी सेना को प्रशिक्षित कर रहें हैं, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों के हस्तक्षेप के तुरंत बाद जिस तरीके से पाकिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या कम करने को मान जाना और फिर हिलेरी की यात्रा कोई बड़ा समधियाना ही लगता है. 
(ये आलेख विभिन्न समाचार माध्यमों के द्वारा प्रदत्त जानकारियों पर एक विश्लेषण है)
आलेख: आशुतोष पाण्डेय 



शुक्रवार, 20 मई 2011

अभी तो काव्य का सोता फूटा ही है: वन्दना गुप्ता

"जो मन में आता है लिख देती हूँ भाषा और शैली के पाश में कविता को बाधना नहीं चाहती, जो देखती हूँ महसूस होता है उसके लिए अनायास ही शब्द बन जातें हैं", ये उदगार हैं .... श्रीमती वन्दना गुप्ता के. वन्दना पिछले कई सालों से कविता और साहित्य की अन्य विधाओं में लिख रही हैं, लेकिन उनके काव्य की मोहकता मन को बरबस आकृष्ट कर लेती है.... भाषा और शैली के पाश में न बधने के कारण ही उनके काव्य में रहस्यवाद की गूढता, भक्तिकाल की शालीनता, श्रृंगार की मोहकता और प्रगतिशील काव्य की प्रगतिवादी रोमांचकता की झलक खुल कर दिखती है, उनके काव्य की विशेषता मानवीय मनोभावों में उनकी गहरी पकड़ है. प्रकृति और मानवीय मनोभावों का सामंजस्य किसी भी समीक्षक के लिए परेशानी पैदा कर देता है.. कई बार लगता है की वन्दना सूफी विचारधार से प्रेरित लगती हैं तो कई बार खुल कर वर्तमान उपादान का दोहन करती भी प्रतीत होती हैं . लिखने के लिए उन्होंने सोशियल नेटवर्किंग का सहारा लिया, काफी नाम भी कमाया है, आज हिंदी में लगातार ब्लोगिंग करती हैं, एक ही ब्लाग में उनकी २५० से ज्यादा कवितायें हैं, दिन दुनिया और साहित्यिक सरोकारों से बेखबर लगने वाली वन्दना दिल्ली के आदर्श नगर में रहती हैं, पेशा गृहणी, शौक लेखन, शिक्षा स्नातक बस इतना सा परिचय है, काव्य की इस चितेरी का. ये पूछने पर की उनकी रचनाएं किससे प्रभावित हैं' एक सपाट सा जवाब आता है जो दिल में आया लिख दिया, सोचती नहीं हूँ, क्या लिखना है? शायद यही कारण है उनकी रोज एक दो नयी कविता पढने को मिलती हैं. अगर उनकी सारी कविताओं को एक साथ रख दिया जाय तो एक महाकाव्य तैयार हो जाए लेकिन अभी तक साहित्य की कसौटी पर कविताओं की समीक्षा ना हो पाने के कारण ही उपेक्षित हैं. कविता के वर्त्तमान उपादानों पर कविता की व्याख्या करें तो उन्मुक्त भाषा का प्रयोग उनकी कविताओं आम आदमी की पसंद बनाता है, लेकिन जो कवितायेँ रहस्यवाद के पुट में हैं उनका सौंदर्य तो देखने के लायक है, हाँ हो सकता है की आम पाठक को वो समझ ना आयें या फिर वह उसे कसौटी पर कस न पाए. कुछ कवितायेँ जरूर निरन्तरता के अभाव में रची प्रतीत होती हैं लेकिन मनोभावों के चित्रण में लेखन की निरंतरता अक्सर बाधित हो ही जाती है. मनुष्य जीवन के लगभग सभी पहलूँ पर कवितायें लिख चुकी वन्दना मानती हैं की अभी तो काव्य का सोता फूटा ही है बस. प्रकाशन के सवाल पर मुस्कराते हुए जवाब देती हैं, "कोई छाप देता है तो ठीक है, मेरा काम है लिखना शेष मेरा कान्हा जाने". कृष्ण भक्तिधारा की कुछ कविताओं में वन्दना मीरा बन जाती हैं. बस बिंदास वन्दना लिखती जाएँ तो अच्छा लगता है.

(ये आलेख हमारी वन्दना जी से हुयी बातचीत और उनकी कविताओं की समीक्षा पर आधारित है. जल्द ही ही हम मूल साक्षात्कार को प्रकाशित करेंगें .)
आलेख: आशुतोष पाण्डेय

भारत फिर से विदेशी उपनिवेश न बन जाए

फिरोज अब्दुल रशीद खान
पी. चिदम्बरम
यूपीए सरकार का बुरा वक्त ख़त्म होता नजर नहीं आ रहा है... एक -आध राज्यों राज्यों में विधान सभा चुनावों के नतीजों पर इतरा रही सरकार आज फिर सी बी आई और आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के आला अधिकारियों की कारगुजारियों से शर्मसार हो गई है, पाकिस्तान को भेजे ५० मोस्ट वांटेड की सूची का एक आतंकी तो मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद है, १९९३ में मुंबई बम काण्ड में संलिपत्ता के चलते फिरोज अब्दुल रशीद खान उर्फ़ 'हमजा' के खिलाफ १९९४ में इंटरपोल के द्वारा रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया था. उसके बाद पिछले साल २०१० फरवरी में इसे नवी मुंबई से सी बी आई द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था और तभी से ये आर्थर रोड जेल में बंद है, लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद ही सीबीआई के द्वारा अभी तक रेड कार्नर नोटिस वापस नहीं लिया गया. अब हद तो तब हो गई जब इस आतंकी का नाम ५० मोस्ट वांटेड की सूची में पाकिस्तान को भेज दिया गया, किसने ये सूची तैयार की? उसकी जाँच क्यों नहीं की गयी? गृहमंत्रालय ने भी इसे भेजने से पहले जांच करना जरूरी क्यों नहीं समझा? अब एक सीबीआई इन्स्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया है और एक डी एस पी का ट्रांसफर कर दिया गया, अब गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने सीबीआई और आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के आला अधिकारियों को झाड़ लगाईं है, लेकिन इतने बड़े मुद्दे पर चिदम्बरम साहब की पूर्व अनभिज्ञता समझ से परे है, इससे पहले भी एक आतंकी बजुहल खान को को लेकर सीबीआई की लापरवाही सामने आयी थी जिसे पाकिस्तान में कहा जा रहा था वह मुंबई थाणे में था. अब तमाम प्रकार की सफाई मंत्रालय के द्वारा और सीबीआई के द्वारा डी जायेगी, लेकिन इस देश में आज कोई भी सुरक्षित नहीं है, जब हमारी सुरक्षा एजेंसियों को जेल में बंद अपराधियों की जानकारी नहीं है तो खुले घूम रहे आतंकवादियों की जानकारियाँ क्या ख़ाक होंगी? आज जब हम इस देश के हालात देखें तो सच सामने आ जाता है, पहले घोटाले दर घोटाले अब सुरक्षा एजेंसियों की ये लापरवाही, कहीं इस देश को बेचने की साजिश तो नहीं चल रही है, इस देश के आंतरिक हालात इतने खराब कर दियें जाएँ की अमेरिका जैसे किसी देश को हस्तक्षेप करना पड़े और भारत फिर से विदेशी उपनिवेश न बन जाए. 
 आलेख: आशुतोष पाण्डेय

नेत्र दान, महादान

नेत्र दान महादान, आपकी एक प्रतिज्ञा दो लोगों की जिन्दगी में रंग भर सकता है। आपकी नेत्रदान की इच्छा दुनिया को एक नई राह दिखायेगी। आइये मिलकर एक शपथ लें दो लोगों की जिन्दगी में रंग भरने की। इनसाईट स्टोरी नेत्रदान को एक अभियान के रूप में चलाना चाहता है। हमारी सारी टीम के सदस्य एक साथ नेत्रदान की घोषणा कर रहें हैं अन्धता-निवारण के लिए कार्य कर रहे कई संगठनों  और इनसाईट स्टोरी टीम की जागरूकता के साथ आप भी किन्ही दो लोगों को रोशनी प्रदान करने की शपथ लें। इस संदर्भ में आपकी सहायता के लिए इनसाईट स्टोरी टीम हर समय तैयार हैं। आप अधिक जानकारी के लिए इमेल के जरिये जानकारी ले सकतें हैं।
हमारा ईमेल पता: editor.insight@hotmail.com 
आप नेत्र दान का प्रतिज्ञा फार्म यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं।

सोमवार, 16 मई 2011

अंधेर नगरी चौपट राजा

हाल में कुछ राज्यों में हुए उपचुनावों ने देश की राजनीतिक तस्वीर को किसी हद तक साफ़ कर दिया है, देश की जनता भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा मानने को तैयार नहीं है, कांग्रेस समर्थित तृणमूल कांग्रेस का पश्चिमी बंगाल में अभूतपूर्व बहुमत और जयललिता की तमिलनाडु में वापसी इस दावे को सच ठहराती है, और कही ना कही आज अन्ना और रामदेव के भ्रष्टाचार की हवा निकाल रहें हैं. अब बड़ा सवाल यह है की अन्ना और रामदेव सही हैं या फिर जनता? क्या हुआ भ्रष्टाचार के खिलाफ खादी जनता एकाएक भ्रष्टाचारियों की समर्थक कैसे बन गयी, दरअसल सच कहें तो ये पब्लिक है सब जानती है.... आज सेलिब्रेटी बनने का शौक अन्ना या नेताओं को है उतना ही आम जनता को भी है.... इस लिए अन्ना को समर्थन देने वाले भी, ज़रा बताएं वोट किसको दिया. 
जनता ने जो किया उसका अपना मापदंड है, अगर वह गुजरात में नरेन्द्र मोदी को जिताती है तो, वही बुद्धदेव अपनी सीट भी नहीं बचा पते हैं, जनता का वोट लोकपाल या विदेश नीति को नहीं मिलता उसका वोट तो खालिश विकास को जाता है, वो भले मोदी करें या नितीश कुमार. अब बात करें उत्तराखंड की जहां इस समय बीजेपी की सबसे अलोकप्रिय सरकार काबिज है, बीजेपी सत्ता की कमान खंडूरी से छीन कविवर निशंक को दे चुकी है लेकिन यहाँ तो अंधेर नगरी चौपट राजा वाली बात हुई, राज्य का विकास तो छोडिये, विनाश करने में कसार नहीं छोडी है इस सरकार ने, ये दावा हमारा नहीं हैं, ये जनता की ही आवाज है, जिसमें वो पूछ रही है कितने बेरोजगारों को नौकरी मिली, वो आपकी एक योजना थी अनाज मिल रहा था... कहाँ लागू है वो, एक यूनिट पर २५० ग्राम चीनी, बिजली की १० घंटे कटौती, निरंकुश नौकरशाही, ये सब क्या है? ये नतीजे हैं हमारी इनसाईट स्टोरी टीम के द्वारा किये गए एक रेंडम सेम्पल सर्वे का, जिसके सभी नतीजे एक दो दिन में आपको मिल जायेंगे, जनता ने जहा पूरे कार्यकाल के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार को १० में से ६.८ दिए हैं वहीं वर्तमान भाजपा सरकार को मात्र ३.७ अंक दिए हैं. 
(आशुतोष पाण्डेय और टीम)

शनिवार, 14 मई 2011

इनसाईट स्टोरी: देश की खबर कानों कान ....

इनसाईट स्टोरी: देश की खबर कानों कान ....: "(रोना आता है... ये हालत देख) ये चंद महीने भारतीय राजनिती में जबरदस्त बदलाव के लिए जाने जायेंगे, पहले घोटाले- २ जी, कामनवैल्थ और तमाम उसके..."

देश की खबर कानों कान ....

(रोना आता है... ये हालत देख)
ये चंद महीने भारतीय राजनिती में जबरदस्त बदलाव के लिए जाने जायेंगे, पहले घोटाले- २ जी, कामनवैल्थ और तमाम उसके बाद अन्ना का आन्दोलन.....फिर अन्ना का मोदी की तारीफ़, भूषण परिवार को लेकर लोकपाल समिति पर हंगामा, उसके बाद लादेन का संहार और अब पश्चिमी बंगाल में लाल झंडे का सफाया. इस बीच में नोयडा में किसान आन्दोलन और पुलिस वालों की मौत. इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है? जिसकी चर्चा करें, ममता की ताजपोशी या फिर कलमाडी और राजा की जेल यात्रा, देखिये हमें ना अपनी टी आर पी बढ़ानी या विज्ञापनों का लोचा, तो सुनिए जो घोटाले हुए मुझे कुछ नहीं मिला, अन्ना का आन्दोलन एक दिन मैंने भी मिस काल मार कर समर्थन किया था, फिर अन्ना साहब ने कहा मोदी साहब सर्वश्रेष्ठ हैं....... भाई अन्ना कहिन...... तो होगा मोदी. अच्छा.... बाद में पता चला ये मोदी अपने गुजरात के ...... नरेन्द्र मोदी हैं (अरे वो ही गोधरा कहीं ...नाम आया था)...... फिर मालूम हुआ की देश में एक भूषण परिवार रहता है जिसके पास इस देश के दो इकलौते कानूनविद हैं तभी तो दोनों को लोकपाल समिति  में लेना मजबूरी थी...... अब लादेन को मार डाला अमेरिका ने लाश कहीं डूबा दी सुनने में आया था, ना मैंने देखा ना अमेरिकी सीनेट ने... खैर यहाँ ओबामा जी बोले तो मानना पड़ा..... लेकिन अपने देश मैं देखो....आतंकवादी तो धरोहर हैं...... अफजल गुरू को कितना संभाल कर रखा है इस देश ने... लादेन पागल था पाकिस्तान में जा छिपा इंडिया में आ जाता बासमती मिलते खाने को...... फासी तो दूर कुछ समय बाद संत बन जाता. अब बारी नोयडा के किसान आन्दोलन की..... दो पुलिस वालों की मौत..... जिला अधिकारी और पुलिस अफसर गोली खा गए, फिर युवराज (क्रिकेट वाला नहीं, राजनिती वाला) राहुल गांधी धरने पर बैठ गए, मीडिया बोली सारी सुरक्षा व्यवस्था को धता बता कर राहुल गाँव पहुचें, हंसी आयी मीडिया की अक्ल पर, यार.. यूपी में सुरक्षा व्यवस्था जैसी कोई चीज होती तो किसान यूं अवैध हथियारों से फायर  नहीं झोकते, और राहुल जी कह गए उन्हें भारतीय होने पर शर्म आती है..... हम कहतें हैं भाई अगर ऐसा है... तो इटली चले जाओ ... ननिहाल.... 
आज फिर ममता जी की ताज पोशी, ३४ साल पुराना कम्युनिस्ट गढ़ ढह गया..... और ममता की सादगी.... सारा श्रेय सोनिया जी को दे डाला...... क्योंकि अभी रेल मंत्रालय का सवाल भी है.... सोनिया जी को खुश रखना जरूरी है...... अभी आने वाले चंद महीनों में बहुत कुछ होना बाकी है..... लेकिन क्या होगा..... अभी एक बात अपने वो समाजवादी वाले थे अमर बाबू ...... उनके कुछ टेप सार्वजनिक होने हैं......
सुनने में आ रहा है.. उत्तराखंड के कवि ह्रदय निशंक जी का विकल्प भी तलाशा जा रहा है...... क्योंकि सड़कें.... स्कूल, अस्पताल, विभाग सब निरंकुश हो गए हैं. 
अंत में जो हुआ या होगा, हमें तो भारत माँ को नमन करना ही है...... माँ तुझे सलाम........
 (आशुतोष पाण्डेय)


सोमवार, 9 मई 2011

हमारी उच्च शिक्षा का काला सच

एक मई २०११ को सम्पन ए आई ईईई की परीक्षा में पेपर लीक होने के बाद उसी दिन फिर परीक्षा करवाई गयी थी, पेपर कैसे लीक हुए या कराये गए, ये सवाल के बारे में बाद में बात करेंगे, अभी जो प्रमुख सवाल है वह एक योग्यता मेरिट लिस्ट के लिए दो परीक्षाएं करवाने का है, ए आई ईईई प्रबंधन ११ मई को फिर से उन छत्रों को परीक्षा देने का मौका दे रहा, जो १ मई को इससे वंचित रह गए थे, लेकिन एक मेरिट के लिए दो परीक्षाएं, ये कहीं ना कहीं छात्रों के समानता के हक़ को प्रभावित कर रहा है, इस फैसले पर रोक लगाने के लिए एनआईटी जमशेदपुर के पूर्व प्रोफेसर ए. पी. सिन्हा ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस निर्णय के विरोध में दायर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर , की है जिसमें हाईकोर्ट ने सरकार को मामले में नोटिस तो जारी किया था, लेकिन ११ मई को उसके दोबारा परीक्षा कराने के फैसले को रोकने से इंकार कर दिया था।  याचिका में मांग की गयी है कि १ मई को कराई  गयी परीक्षा को निरस्त कर नए सिरे से सभी विद्यार्थियों को सामान रूप से प्रदर्शन का मौका मिलना चाहिए, पर कई बार पेपर लीक होने के बाद ऐसी स्थितियां अक्सर पैदा होती हैं, लेकिन कोई ठोस कदम इस बाबत नहीं उठाये जातें हैं जिसके चलते, पेपर लीक होने से रोका जा सके, और बिना उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के ये सब संभव कैसे हो सकता है, ये यक्ष प्रश्न है? 
इस समय देश में कोचिंग माफियाओं की बाढ़ सी आ गयी है, इसमें से कई तो १०० फीसदी सफलता की गारंटी देतें हैं, और कई बार प्रवेश परीक्षाओं की मेरिट देखकर लगता भी है की, दाल में कुछ काला है, इतना ही नहीं इस हद तक फिक्सिंग देखने को मिलती है की मनचाहे कालेज में एडमीशन की गारंटी तक ये कालेज दे देतें हैं. 
शिक्षा के नाम पर हो रही तमाम फिक्सिंग हर स्तर पर हर जगह मिलती है, फर्जी मार्कशीट, प्रमाण पत्र, डिग्री, क्या नहीं मिलता है, शिक्षा के इन माल्स में. इसके अलावा आज तमाम प्राइवेट कालेज भी कोई कम प्रदूषण नहीं फैला रहें हैं, पैसा दो मन चाहे कोर्स में एडमीशन लो, लाखों रूपया ऐठने वाले ये कालेज मानकों की खुले आम धज्जियां उड़ा रहें हैं, क्या ये ही है, हमारी उच्च शिक्षा का काला सच? 

(आशुतोष पाण्डेय )

गुरुवार, 5 मई 2011

जनता को भ्रष्ट मत कहना ......

ब्लाग, अपनी मर्जी से कुछ भी लिखने का एक मंच। यहाँ कोई अपनी भडास निकालता है तो कोई अपनी अभिव्यक्ति को आवाज देता है। कोई और मेरी सुने या ना सुने अब में कह सकता हूँ। भले ही में एक स्टार न बन सका फ़िर भी स्टार ब्लागर बनने का ख्वाब तो पूरा कर ही लूँ। खैर जाने भी दो यारों दो -चार गिले शिकवे तो कर लें। आजकल हमारे देश में दो मुद्दे बेहद गर्म हैं......... पहला तो जनता की कमर तोड़ रहा है दूसरा यू पी ए सरकार की चूलें हिला रहा है। महंगाई क्या कहने इसका विकास सबसे ज्यादा हुआ........ दूसरा भ्रष्टाचार........ इसका हल्ला सबसे ज्यादा हुआ...... दोनों में से कम क्या हुआ? तो एक ही जवाब है गरीब की रोटी, वैसे भी हमारी सरकार की अध्यक्ष महोदया तो पिज्जे वाली हैं....... और देश के प्रधानमंत्री महोदय को पेंशन मिलती ही होगी, इन के लिए तो रोटी कोई बात नहीं, हर कह रहा है में चोर नहीं, वो चोर है.......... जय-जय इन चोरों की. कुछ चोर खुश हैं की ओसामा मारा गया ......... कुछ पवन हंस से कमीशन खाने में. इनकी भी जय हो. कुछ काले  धन पर नजर गड़ाएं हैं की कब आये और कब दान मांगे एसी काटेज बनाने है, बड़े योग करने वालों के लिए, जय हो बाबा रामदेव की उन्होंने हमारे भ्रष्ट नेताओं को योग सिखा दिया, अब नेता चंगे हैं और जोरों से लूट रहें है....... राजा हो या अपने कलमाडी जी, सब मस्त हैं, जानते हैं योग में काफी ताकत है...... ये योग ही तो था जिसके चलते इतना कमा लिया, ऐसे योग सब को नहीं मिलते क्योंकि कामनवैल्थ गेम रोज नहीं होते.......... और देखिये .......... योग संयोग ......... जनता को मिल गई फेशबुक वो उसमें खुश ......... बुद्धिजीवी वाल, पोस्ट, कमेन्ट के जंजाल में, जय जय जय हो भाग्य विधाता जनता की, अरे ये क्या कर दिया जनता के ऊपर टिप्पणी, इस देश की जनता पर टिपण्णी ना बाबा ना! ........... ? अब सोच लो ...... ये लोक तंत्र है केवल जनता सरकार को भ्रष्ट कहेगी, जनता को कोई कुछ मत कहना ......... ये है जनता योग!

रविवार, 1 मई 2011

2 जी घोटाले: नया घमासान शुरू



भाजपा और कांग्रेस के बीच 2 जी घोटाले पर लोक लेखा समिति कि रिपोर्ट को लेकर नया घमासान शुरू: 
मुरली मनोहर जोशी ने रिपोर्ट को लोक सभा अध्यक्ष के पास भिजवा दिया है और अध्यक्ष से ये आग्रह किया है कि इस रिपोर्ट को मंज़ूर करें. रिपोर्ट लोक सभा अध्यक्ष के पास भिजवाने के बाद जोशी ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि समिति में कांग्रेस सदस्यों ने केंद्रीय मंत्रियों के दिशा निर्देशों पर काम करते हुए हंगामा किया. उन्होंने कहा, "समिति में रिपोर्ट का विरोध करने वाले यूपीए से संबंधित संसद सदस्यों के पास पर्चियाँ आ रही थीं." जोशी ने चिदम्बरम के बयानों से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्ही की और संकेत कर कहा, "जो मंत्रिगण समिति के सदस्यों को कठपुतलियों की तरह नचा रहे थे उनका नेतृत्व कौन कर रहा था?".
समिति के सदस्यों के रिपोर्ट को खारिज करने के प्रश्न पर उन्होंने कहा ये असंवैधानिक है. मत विभाजन पर उन्होंने कहा ये किसकी अनुमति से हुआ? उन्होंने कहा, "मामले का राजनीतिकरण न करें. रिपोर्ट का विरोध करने का सबको अधिकार है लेकिन दलगत आधारों पर पीएसी का कामकाज नहीं चल सकता. भ्रष्टाचार का समर्थन करने वाली सरकार ज़्यादा दिन नहीं टिकेगी. हमारी अपेक्षा है कि ये रिपोर्ट संसद में पेश हो." इस रिपोर्ट को लेकर हाल के दिनों में पीएस की बैठक में जमकर हंगामा हुआ है.  दरअसल मीडिया में इस रिपोर्ट के मसौदे के लीक होने की ख़बर पर विवाद खड़ा हो गया था. लीक रिपोर्ट में 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और ख़ुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी कई सवाल उठाए गए हैं.
(आशुतोष पाण्डेय)

मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

हम सब चोर हैं.......

                असल में सरकारों को तो सब कोसते हैं, लेकिन हम ये भूल जातें हैं की ये हमारे द्वारा तैयार व्यवस्था का एक अंग हैं किसी आफिस में आकर देखिये घूस लेने वालों से देने वालों की लम्बी कतारें हैं. हर आदमी चाहता है की उसका काम पहले हो, वो रोड पर गलत  चले उसका चालन न हो, बिजली की चोरी करे उसे कोई पकडे नहीं, वोट के बदले नोट ले लेकिन उसका कुछ बिगड़े नहीं, नौकरी खरीदने के साथ, मेनेजमेंट कोटे से इंजीनियरिंग और मेडिकल की सीटें खरीदने वाले अनगिनत हैं. जिन गाँव को भोला भला कहा जाता है, वहा कुवारी लड़कियां विधवा पेंशन ले रहीं हैं, इन गाँव में बिना शराब के वोटर पोलिंग बूथ नहीं आता है. एक बार इन्हें ठीक करवा दीजिये, सब ठीक हो जाएगा, अन्यथा लोकपाल या सूचना का अधिकार कुछ नहीं हो सकता है, और हम और आप अपना नाम कमा रहें हैं सरकार को कोस कर, हमें Comments चाहिए बस, जितना समय हम फेसबुक पर बिताते हैं उसका १/४ भी देश को दें तो कायाकल्प हो जाएगा, ये सच है मैंने खुद करके देखा है, आप जानती हैं, जब मैंने जंतर मंतर पर जाकर फोटो खिचवा कर फेसबुक पर अपलोड करने वालों की खिचाई की तो मुझे ब्लाक कर दिया. क्योंकि मेरे पोस्ट उनके वाल पर उनकी पोल खोल रहे थे, लोगं कितने लोग है जो फेसबुक  भ्रष्टाचार के लिए सरकारों को कोसते हैं, और उन्होंने कभी कोई भ्रष्टाचार ना किया हो, करवाया हो, भ्रष्टाचार की लड़ाई में खड़े अन्ना अब ये कह रहें की अगर ये बिल संसद में पास नहीं होता है कोई बात नहीं, वे संसद की मर्यादा की रक्षा करेंगे और इसे स्वीकार करेंगे, वही अन्ना कल मोदी को सर्वश्रेष्ट का खिताब देतें हैं, तो किरकिरी होने के बाद स्वामी अग्निवेश से कहलावातें हैं की अन्ना को तथ्यों की जानकारी नहीं थी, और देखिएगा इस देश में परिवारवाद का हल्ला आम है...... लेकिन जब श्री शशि भूषन और उनके बेटे को एक साथ लोकपाल कमेटी में लिया गया तो किसी को कोई परेशानी नहीं हुई, सरकार तो चोर है...... जी हम आपकी बात मान लेते हैं ज़रा ध्यान दीजिये........ जंतर मंतर के नेताओं पर प्रशांत भूषन जी जो विगत   पांच सालों से अमर सिंह के खिलाफ एक केस में वकील हैं वो साफ़ कहते हैं की वो अमर सिंह को नहीं जानते हैं, वैसे भी इतने प्रख्यात  वकील होकर अगर उन्होंने अभी तक ये जानने की कोशिश नहीं की जिस शख्स के खिलाफ वो वकालत कर रहें, तो वो लोकपाल के बारे में क्या खाक जानेंगे? कहने का लब्बोलुआब ये है की सरकार के लोग ही नहीं सब भ्रष्टाचारी हैं, मैंने तो अपने ब्लॉग पर अन्ना को लिखा था अनशन नहीं.. लाठी उठाइए और इस देश की आत्मा को परिष्कृत कीजिये. अब बताइयेगा क्या योगदान दे रहें हैं हम? दोस्तों यही सवाल आप सब से?

आशुतोष पाण्डेय 

गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

अन्ना हजारे अनशन अपडेट:

अन्ना हजारे अनशन अपडेट:
इनसाईट स्टोरी, अन्ना के अनशन को ख़त्म करवाने के लिए जल्द ही प्रधानमंत्री कार्यालय एक नया पैकेज ला रहा है. अन्ना के समर्थन में लोगों के बढ़ते हुजूम को देखकर तुरंत कोई कदम उठाने आवश्यक हो गए हैं. जन लोकपाल विधेयक को संसद के आगामी सत्र में लाने  का आश्वासन तो दिया ही जा सकता है. अन्ना ने एक न्यूज चैनल को दिए अपने एक वक्तव्य में कह डाला की "सरकार सत्ता के मद में चूर है", लेकिन सच तो यह है की यदि सरकार इस विधेयक को सदन में लाती भी है तो क्या इसे पास करा पायेगी?
आम जनता का एक बड़ा वर्ग तो ये भी नहीं जनता अन्ना कौन हैं, हमने जब इस मुहिम के बारे में लोगों की राय  जाननी चाही तो लोगों का पहला सवाल था "ये अन्ना हजारे कौन हैं"? हाँ कुछ लोग इस बारे में उत्साहित दिखे, उनमें से एक महानुभाव जो अपने बच्चे के एड्मिसन के लिए २०,००० रूपया डोनेशन देकर स्कूल से बाहर आ रहे थे उनके जज्बात " भ्रष्टाचार के खिलाफ हम अन्ना का साथ देंगे मैंने आज ही २५ मिस काल कर अन्ना का समर्थन किया". जब हमने उनसे वो २०,००० वाली बात पूछी तो बिना उत्तर दिए कार के शीशे चढ़ा चल दिए, ऐसे लोग भी हैं अन्ना के समर्थक.
खैर अभी की अपडेट आपके लिए, जल्द ही अन्ना से सरकार बातचीत के लिए वातावरण तैयार कर रही है इसके फार्मूले पर विचार किया जा रहा जिससे तत्काल स्थिति को नियंत्रित किया जा सके.

इनसाईट स्टोरी अपडेट डेस्क 

अनशन छोड़िये, छडी उठाइए और इस देश की भ्रष्ट आत्मा को सुधारिए.

अन्ना हजारे का अनशन जारी है..... लेकिन कब तक रहेगा. कुछ ही दिनों में इसे समाप्त करवा दिया जाएगा, उधर शायद अन्ना भी ये जानते हैं की इस प्रकार के आन्दोलनों का क्या हश्र होता है? लोकपाल क़ानून बने, बनना भी चाहिए, लेकिन अन्ना ये कहते हैं की इसके लिए जो कमेटी बने उसमें आधे गैर राजनीतिज्ञ हों.
पहला सवाल: गैर राजनितिक कौन है? जो संसद में बैठा है क्या उसे ही राजनेता कहा जाएगा?
दूसरा सवाल: क्या अन्ना राजनितिक सोच नहीं रखतें हैं?
तीसरा सवाल: क्या गारंटी है की गैर राजनितिक शत प्रतिशत ईमानदार हैं? जरा देश में होने वाले चुनावों को देखिएगा, पंचायत से लेकर संसद तक चुनावों में वोट देने के लिए आम आदमी अपना वोट बेचता है.
व्यापारी टैक्स की चोरी में सबसे आगे हैं?
नौकरशाह भी भ्रष्ट हैं?
मीडिया वाले प्रेस लिखकर नियम कानूनों के धुर्रे उड़ाते हैं?
न्यायपालिका के ऊपर भी लगातार सवाल उठते हैं?
तो कौन होगा इस लोकपाल लागू करवाने वाला?
अन्ना कहा से लायेंगे ईमानदार लोगों को?
क्या अन्ना ये नहीं जानतें हैं?
अगर नहीं तो जानना चाहिए.
जानते हैं तो पहले इस देश की जनता को
शुचिता सिखानी पड़ेगी.
अनशन छोड़िये, छडी उठाइए और इस देश की भ्रष्ट आत्मा को सुधारिए.

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

अन्ना हजारे का समर्थन क्यों?

अन्ना  हजारे 

मेरा भारत महान है. वास्तव में इतनी हडतालों, अनशनो, जुलूसों के बाद भी ये चल रहा है. हर ओर भ्रष्टाचार का हल्ला मचा है. भारत विश्व कप क्या जीता लोगों को भ्रष्टाचार की याद थोड़ी हल्की हुयी. लगता है की अब शायद इस देश में कुछ होना बाकी नहीं रहा. अन्ना हजारे के अनशन के साथ एक बार फिर इस देश का स्वंयभू बुद्धिजीवी फिर उद्द्वेलित दिख रहा है. इससे पहले रामदेव का भारत स्वाभिमान जगा था, देश का काला धन वापस आने वाला था, रामदेव कहते थे की देश के हर नागरिक को लाख रुपया मिलेगा. खैर नागरिकों को तो मारो गोली, रामदेव जी ने अपने खास चन्दा देने वालों के लिए योग करने के लिए एसी काटेज बना दियें हैं, जहां पांच सितारा सुविधाएँ हैं. एक संत को जब पञ्च सितारा सुविधायों वाला एसी काटेज योग करने के लिए बनाना पड़ा हो तो एक मंत्री भी ये सब करे जिसे चुनावों में जनता के बिकने वाले वोट खरीदने पडतें हैं, वो भी कुछ करोड़ जमा कर ले तो क्या जाता है? भ्रष्टाचार कौन नहीं करता है मुझे बताये? हर इंसान कहीं न कहीं आचरण से भ्रष्ट है. सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार का हल्ला आजकल संत कर रहें हैं?
जरा देखिये इन संतों को चन्दा कौन देता है? क्या ये कोई काम करते हैं? सिर्फ बातों से दुनिया को चलाने वाले संत या फिर आन्दोलनकारी सबसे ज्यादा भ्रष्ट आचरण करतें हैं. आजकल कई संत आडिट करवा कर चंदा वसूल रहें हैं. न जाने कितने ट्रस्ट या फिर संगठन इन संतों के पास हैं. मुफ्त में मिलने वाले गौ मूत्र को बोतलों में बंद कर जनता को खुले आम लूटने वाले लोग क्या भ्रष्ट नहीं हैं. इसका मतलब ये नहीं की हम भ्रष्टाचार को मान्यता दे दें लेकिन सावधान रहें कुछ लोग हैं जो भ्रष्टाचार का हल्ला काट हमारी जेबें काट रहें हैं. ऐसे में अन्ना हजारे का समर्थन क्यों?

गुरुवार, 17 मार्च 2011

एक बार फिर लोकतंत्र की ह्त्या!

एक बार फिर लोकतंत्र की ह्त्या! विकीलीक्स का नया खुलासा मनमोहन सरकार ने न्यूक्लियर डील पर विश्वास मत प्राप्त करने के लिए सांसद खरीदे थे. घोटाले और मनमोहन सरकार एक दुसरे के पूरक बन चुके हैं. लगता है की अगर घोटाले ना हों तो सरकार चल ही नहीं पायेगी. २ जी घोटाला, कामन वैल्थ गेम घोटाला, अब एक नया घोटाला २००८ में सरकार बचाने के लिए सांसदों की खरीद. बेशर्मी की हद तो यह है की इतने सब के बाद भी ये भ्रष्ट रोज संसद को गंदा कर रहें हैं. ये आरोप है की राष्ट्रीय लोक दल के सांसदों को करोड़ों रूपयों में खरीदा गया. इस पार्टी के अध्यक्ष अजीत सिंह इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर रहें हैं. लेकिन विकीलीक्स की केबल देखिये इस वाकये की पूरी तस्वीर पूरे घटनाक्रम के साथ उपलब्ध है. 
पढ़िए विकीलीक्स का पूरा खुलासा यहाँ क्लिक करें.  

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

भारत मैं हार्ट अटैक लेगा सबसे ज्यादा जानें.

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत समेत दक्षिण एशिया एक बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक उन लोगों की संख्या ख़ासी बढ़ रही है जो हृदय रोग, मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियों से ग्रस्त हैं.



Heart, section through the middle
ये दिल भी क्या चीज है? 


विश्व बैंक की रिपोर्ट में पाया गया है कि पूरे दक्षिण एशिया में 55 प्रतिशत मौतें असंक्रामक बीमारियों के कारण हो रही हैं. 'दक्षिण एशिया में असंक्रामक रोगों का सामना' रिपोर्ट में दक्षिण एशियाई क्षेत्र में 15 से 69 वर्ष के लोगों में हृदय रोग को मृत्यु का मुख्य कारण बताया गया है.
ये रिपोर्ट 8 देशों  बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, मालदीव और श्रीलंका में अध्ययन के बाद तैयार की गई है.
एक अनुमान के अनुसार भारत में वर्ष 2030 में होने वाली मौतों का मुख्य कारण हृदय रोग होगा और 36 प्रतिशत से ज्यादा मौतें सिर्फ इसके कारण होंगी. 

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

New Blindness Data Released



Recently released World Health Organization (WHO) data indicate that prevalence of visual impairment has been significantly reduced to 285 million. Of these, 246 million have moderate to severe visual impairment, while an estimated 39 million are blind.

This reduction reflects the investment of governments and their international development partners in improving eye health services and strategies. Socioeconomic developments have also contributed in many countries to these welcome trends.
 
Key Global Facts:

  • A total of 285 million people are visually impaired
  • Of these, 39 million are blind
  • 246 million have moderate to severe visual impairment
  • 63% of those with low vision and 82% of blind people are over 50 years of age
  • Of the six WHO world regions, South East Asia and Western Pacific account for 73% of moderate to severe visual impairment and 58% of blindness.
Challenges remain to achieve the VISION 2020 goal of eliminating the main causes of avoidable blindness by the year 2020. The top three causes of blindness in the 2010 estimates are cataract, glaucoma and age-related macular degeneration. This highlights the recent trend towards a decline in infectious diseases, while chronic diseases, which affect both the developed and the developing world, are rising steeply.


Prepared By: Ashutosh Pandey

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

जीवन के रंग

आज दुनिया जिस रफ्तार से दौड़ रही है उसे देखकर तो अहसास होता है कि इंसान कितना प्रगतिशील हो गया है. वहीं अगर उसकी कुंठा की रफ्तार देखें तो वह तो और भी तेज नजर आती है. सब कुछ जल्द पा लेने की इच्छा ने उसे मशीन बना डाला है. संवेदना और सहानुभूति जैसे शब्द आज सिर्फ किताबी लफ्ज़ लगतें हैं. हम ऐसे क्यों हो गएँ हैं? ये सवाल शायद ही कोई खुद से पूछता हो. जिंन्दगी का हर पहलू स्वार्थ से शुरू हो स्वार्थ पर ही सिमट कर रह जाता है. आज लम्बे अंतराल के बाद कुछ लिखने का दिल हो रहा है. पिछले कुछ दिनों में कई मिले-जुले अहसास हुए हैं. अपनों की गैरत, परायों की कुंठा सब देखने को मिला. मेरे एक पड़ोसी को इस बात को लेकर परेशानी थी की में अपनी पत्नी के साथ बैठकर खाना खाता हूँ. पता नहीं इस में बुरा क्या था? पर जय हो उनकी, मुझे बार-बार उनकी कुंठा अपनी पत्नी के भरपूर प्यार का अहसास दिलाती है. काश उनके के घर में भी ऐसा होता. मैंने अक्सर देखा की उस घर में पत्नी एक विकल्प की तलाश में रहती शायद वो उब चुकी होगी उन जनाब से, वो जनाब भी तो मौका मिलते ही आखें सेकने का कोई मौक़ा खोते ही नहीं हैं. उनकी भी जय हो. जय हो उन सबकी. भगवान् से इस बार उनके लिए सदमति की मांग नहीं कर रहा हूँ, वो ऐसे ही बने रहें कम से कम उनकी कुंठा और हश्र देख मैं तो संभल जाऊं. जीवन के रंग
आशुतोष पाण्डेय 

शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2010

चाँद, चांदी और पानी ........

चाँद पर पानी और चांदी क्या कहने? अब तो चाँद पर जाने वालों को एक नया काम मिल गया चांदी काटने का. नासा के वैज्ञानिकों ने चांद के दक्षिणी ध्रुव से लाए गए जमे हुए क्रेटर के हिस्से के विश्लेषण के बाद पाया है कि चांद की मिट्टी में इतना पानी है कि वहां जानेवाले अंतरिक्षयात्रियों का काम चल सकता है. ये तथ्य उस प्रयोग के बाद सामने आया है जिसमें एक रॉकेट को चांद पर मौजूद एक गढ्ढे में टकराया गया था. उसके कुछ ही मिनटों में एक उपग्रह को उस टकराव से उठे धूल और भाप के बीच से गुज़ारा गया. उपग्रह को काफ़ी मात्रा में जमा हुआ पानी, कार्बन डाइ ऑक्साइड, अमोनिया और चांदी के भी अंश मिले. नासा के वैज्ञानिकों के दल के अनुसार  जिस क्रेटर से रॉकेट को टकराया गया उसमें से 175 किलोग्राम भाप और बर्फ़ निकली. नासा का कहना है कि पानी इतना है कि आनेवाले दिनों में जो अंतरिक्ष अभियान होंगे उस पर जानेवाले अंतरिक्षवैज्ञानिक उस पानी का इस्तेमाल कर सकेंगे. नासा के एक वैज्ञानिक का कहना था, “जो पानी है वो बर्फ़ के छोटे-छोटे दानों में है. ये अच्छी ख़बर है क्योंकि इसे इस्तेमाल करने के लिए बहुत गर्म नहीं करना पड़ेगा. यदि आप उसे कमरे के तापमान पर भी ले आते हैं तो उसे धूल में से निकालना बेहद आसान होगा.” लेकिन गौर तलब बात ये है कि  जमा हुआ ये पानी चांद के दक्षिणी ध्रुव पर हर जगह हो ऐसा नहीं है. ये कई छोटी-छोटी  जगहों में सिमटा हुआ है. शोध से ये भी पता चला है कि जमा हुआ पानी उन इलाकों में भी हो सकता है जिन्हें हमेशा सूरज की रोशनी मिलती है बशर्ते वो सतह से काफ़ी नीचे हों.
इनसाईट स्टोरी के लिए आशुतोष पाण्डेय

शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

अब इनसाईट स्टोरी एक नए कलेवर में

Now Read the “Insight Story” in a new look with new features and look.

अब इनसाईट स्टोरी एक नए कलेवर में आपके सामने होगी.
हम स्वागत करतें हैं उन सभी लोगों का जो देश को सौहार्द और समृद्धि की राह पर देखना चाहतें हैं.
आपकी समस्याएं, आपके सुझाव, आपका साथ और आप की बेबाकी हमें कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देगी.
हम आपके बीच में आकर आपकी समस्यायों को जानेंगे और आपको निजात दिलाएंगे.
(सुषमा पाण्डेय)
अगर आपकी कोई समस्या हो तो हमें एस एम एस करें  <आपका नाम > <शहर/गाँव> <आपकी समस्या > मोबाइल 09258758804. इन्तजार  करें हमारे  एस एम एस जो आपको मिलेगा २४ घंटे के अन्दर.
  1. सूचना का अधिकार? कैसे मांगे सूचना.
  2. आपका अधिकार क्या है?
  3. किन विषयों पर सूचना मांग सकतें हैं?
  4. किन विषयों पर सूचना नहीं दी जा सकतीं हैं?
  5. अगर आपको कहीं से सूचना प्राप्त करने में कोई परेशानी आती है तो हमें बताएं फोन करें प्रातः १० बजे से २ बजे के बीच (सोम-शनि). मोबाइल 092587588074.
  6. हमसे आप  सीधे मिल भी सकतें हैं?
  7. पढिये सूचना अधिक्कार अधिनियम हिंदी में डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें.

शुक्रवार, 11 जून 2010

मैं चुप हूँ कि मेरा कोई नहीं मरा............

भोपाल  गैस कांड भले ही कौन भूल पायेगा. १५००० से ज्यादा लोगों की मौत और फिर २६ साल के इन्तजार के बाद दोषियों को मात्र दो साल की सजा. माननीय कोर्ट ने तो साक्ष्यों के आधार पर ही फैसला सुनाया होगा. लेकिन अफ़सोस तो उन लोगों पर किया जाना चाहिए जिन्होंने ऐसे साक्ष्य पेश किये की फैसला ऐसा मिला. पर अब क्या वो लोग जिनके परिवार उजड़ गए कोर्ट के फैसले का सम्मान कर पाएंगे. इसलिए तो कोर्ट के फैसले पर लोगों में तीखी प्रतिक्रिया मिली. लेकिन क्या सारा देश उन लोगों के साथ खड़ा था?
कुछ लोग जरूर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकेंगें. सवाल तो वहीं का वहीं रहेगा. आखिर हमारी संवेदनाएं तब ही क्यों जाग्रत होतीं हैं जब हम खुद शिकार होतें हैं.
क्या सारे देश को एक पल के लिए ही सही इस त्रादसी से त्रस्त लोगों के साथ बोलना नहीं चाहिए था? आपकी ये चुप्पी समझ नहीं आती है. खैर किया भी क्या जा सकता है क्योंकि आपके साथ तो कुछ बीता ही नहीं. इन्तजार  कीजिये जब आप भी ऐसी ही त्रासदियों के शिकार हों और अकेले खड़ें हों? मेरी सहानुभूति सिर्फ आप लोगों से है जो चुप हैं.

(आशुतोष पाण्डेय)

सोमवार, 5 अप्रैल 2010

1000 Cities, 1000 Lives


विश्व स्वास्थ्य दिवस 7 अप्रैल 2010 ke अवसर पर IGEET  के द्वारा एक व्याख्यानमाला का आयोजन हल्द्वानी शहर को विभिन्न स्कूलों में किया जाएगा. इस वर्ष का विषय शहरीकरण और स्वास्थ्य पर आधारित है. 1000 Cities, 1000 Lives इस बार का थीम निर्धारित किया गया है. 2020 तक भारत की 41 % जनसंख्या शहरों में निवास करेगी, जो अभी मात्र 28 % के पास है. इस प्रकार आने वाले एक या दो दशकों में शहरों में स्वास्थ्य की समस्या काफी अहम् हो जायेगी जिसके लिए अभी से प्रयास किया जाना आवश्यक हो जाता है. शहरों के हालत पर नजर डालें तो हर तीन आदमियों में एक झुग्गियों में रहता है. शहरीकरण के साथ-साथ जन स्वास्थय की स्थितियों को बेहतर करने के लिए सामुदायिक प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है. IGEET एक प्रयास कर रहा है शहरों में रहने वालों की पूर्ण भागीदारी की जिससे उनके लिए अच्छे स्वास्थ्य के विकल्प तैयार किये जा सकें.

बुधवार, 20 जनवरी 2010

क्या ऐसा कर पायेंगे आप.....................................?

         शादी का लड्डू जो खाए वो पछताए जो न खाए वो भी पछताए. ये शादी की एक ऐसी परिभाषा है जिसने शादी को महज एक कहावत बना दिया है. लेकिन अगर देखें तो शादी एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें दुनिया के सभी रिश्ते खुद जुड़ जाते हैं. जीवन की शुरुआत से लेकर एक नयी सृष्टि का सृजन तक सभी इस रिश्ते में मिल जाता है. दो दिल, दो जिस्म, दो अंतरात्मा, दो सृजक और दो इंसानी रिश्तों की बानगी से बढ़ कर एक रिश्ता है शादी. शादी एक लडडू नहीं है जिसे खाया जा सके. विवाह एक दैवीय संयोग है जिसे इंसान के जन्म से पहले उसके लिए निर्धारित किया गया होता है.
         क्या करें उन लोगों के लिए जिन्होंने शादी को भोग से जोड़ दिया? मात्र चंद रिश्तों की अदायगी को शादी मानने वाले दरअसल इस के काबिल ही नहीं की वो शादी करें. लानत हैं उन लोगों पर जो शादी के बाद पति या पत्नी के रिश्ते को केवल स्वार्थों के लिए जिन्दा रखें हैं. रोटी, कपड़ा, मकान ये तीन जीवन की आवश्यकताएं हो सकती हैं, लेकिन इनकी पूर्ति मात्र को शादी का नाम नहीं दिया जा सकता है. शादी एक संस्थान है, जिसमें दो लोगों के अलावा, एक परिवार, एक समाज, एक दुनिया बसती है.
        कभी दिल की गहराई से इस रिश्ते को महसूस करने की कोशिश करें. तब शादी एक लड्डू से ज्यादा  आपकी  जीवन्तता की पहचान बन जायेगी.  पति या पत्नी तब एक दूसरे की चाहत बन जायेंगे, जरा महसूस कीजिए अगर जब आप का दिल धडके तो आपका जीवन-साथी उसे अपनी दिल की धड़कन मान ले. काश ऐसा हो, हर दिल ये चाहेगा, लेकिन कितने दिल खुद को ऐसा बना लेंगें की वे जीवन-साथी की धड़कन को अपने दिल से सुनने लगें. कोशिश कीजिये इसकी खूबसूरती को महसूस करने की, दिल को दिल के करीब ला हर धड़कन को अपनी समझने की. शादी को एक खुशनुमा हकीकत बना दें, दुनियावी रस्मों की अदायगी के साथ एक ऐसी सृष्टि का सृजन जिस पर खुदा भी फक्र कर सके. क्या ऐसा कर पायेंगे आप. ....................................?
आशुतोष पाण्डेय     

मंगलवार, 19 जनवरी 2010

Workshop on: "Creative Writing: Statistical Application and Significance".

19 जनवरी  2010, IGGET और Education Mantra के संयुक्त तत्वाधान में "Creative Writing: Statistical Application and Significance". विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन हल्द्वानी में किया गया. इस अवसर पर IGGET के निदेशक आशुतोष पाण्डेय ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया. उन्होंने लेखन में अधिक आकड़ों और उनके सही विश्लेषण पर जोर दिया. और कहा कि Sampling, Data Analysis, Reporting और Presentation के सही तरीकों का इस्तेमाल कर हम अपने लेखन को अधिक प्रभावशाली और दिलचस्प बना सकतें है. एक लेखक को एक अच्छा समीक्षक और विश्लेषक भी होना चाहिए.
Subject of Workshop: "Creative Writing: Statistical Application and Significance".
Venue: IGEET, Campus, Haldwani.
Resource Persons: Mr. Ashutosh Pandey.
Media Interection: Deepak Das, District Representative INSIGHT STORY, U.S. Nagar.
Reports Send to: Amar Ujala Haldwani.
Dainik Jagran, Haldwani.
Uttar Ujala, Haldwani.


 

शनिवार, 16 जनवरी 2010

उफ़ ये ठण्ड


उफ़ ये ठण्ड! इस बार कई सालों लोग ये कहते नजर आ रहे हैं. एक ओर दुनिया भूकंप से काँप रही है वहीं दूसरी ओर इस बार ठण्ड भी जानलेवा हो रही है. हमने जब इस ठण्ड पर कुछ लोगों की प्रतिक्रिया जाननी चाही तो  बुजुर्ग  सबसे ज्यादा चिंतित दिखे. उनका कहना है की एक ओर बुढ़ापा और दूसरी ओर ये ठण्ड, कई प्रकार की परेशानियां एक साथ शुरू. यही हाल स्कूल जाने वाले बच्चों का भी है. उनकी अपनी परेशानियां हैं लेकिन वो चाहतें हैं की ये ठंडा कायम रहे और कुछ छुट्टियाँ और मिलें. सबसे बुरा हाल मजदूरी करने वाले उन मजदूरों का है जो दिन भर कमा शाम को परिवार के गुजारे के लिए कमाते हैं. एक तो इस ठण्ड में काम ही नहीं मिलता है, अगर कहीं मिल भी जाय तो ये कम्बखत ठण्ड काम करना मुश्किल. मौसम वैज्ञानिक भी इस वर्ष की ठण्ड को काफी आश्चर्य-चकित करने वाली बता रहें हैं. खैर कुछ भी हो कई सालों बाद इस मौसम की वापसी हुई है. हमें इसका स्वागत करना छहिए बशर्ते की ये ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम न हो.
इनसाईट स्टोरी टीम

उत्तराखंड: देवभूमि का पहला महाकुम्भ



माघ का महीना और महाकुम्भ आस्था का महापर्व आरम्भ हो चुका है. सदी का पहला महाकुम्भ वो भी देवभूमि उत्तराखंड में. हरिद्वार हिमालय से प्रस्फुटित गंगा के पावन जल से सिंचित परम धाम है. देव भूमि में देवत्व की यह पराकाष्ठा वास्तव में एक अद्भुत भारत के दर्शन करवाएगी.  देश के हर कोने से आयी आस्था की लौ इस कुम्भ भूमि को और पावन बनायेगी.  मौनी अमावस्या और सूर्य ग्रहण के साथ शुरू इस महाकुम्भ की मान्यता और बढ़ जाती है. 14 जनवरी प्रातः 11:28, वो घड़ी जब इस माहपर्व से हरिद्वार आलाह्दित हो गया,  मानो सारे देवता एक साथ धरा पर अवतरित हो गये हों.  हम भारत के आध्यात्मिक गुरू होने की कल्पना को साकार करना चाहते हैं. आप सभी को इस महापर्व की दैवी शुभकामनाएं.
इनसाईट स्टोरी टीम
उत्तराखंड

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मंगलवार, 1 दिसंबर 2009

हम कहाँ हैं.

कई बार ये सोच कर सोच कर आश्चर्य होता है की हम सभ्यता की दौड़ में दौड़ने वाले लोग कई बार कितने असभ्य हो जातें हैं। धोखा छल आज हमारे लिए एक आम बात हो गई है। रिश्तों की भीड़ तो हम जोड़ लेतें हैं पर जब निभाने की बात आती है तो हम सिर्फ़ औपचारिकता तक सीमित हो जाते हैं। आज दांपत्य जीवन से लेकर व्यावसायिक जीवन सभी जगह सुचिता का पूर्ण अभाव मिलता है। पति और पत्नी से लेकर व्यापार में साझीदार सभी एक दूसरे के साथ धोखा करने में उफ़ तक नहीं करतें हैं। हम ऐसा क्यों करते हैं? इसका जवाब मिलता है की अपने भले के लिए कुछ भी किया जाय ठीक ही है। शायद किसी हद तक ये बात मान भी ली जाय तो भी ये एक ऐसा सवाल सदा बना रहेगा जिसका जवाब किसी के पास न हो आख़िर अपने चंद फायदों के लिए हम कब तक रिश्तों के साथ खेलते रहेंगे। एक बात याद रखें की रिश्तें कभी एक ओर से नहीं बनतें हैं। एक रिश्तें में कई रिश्तें और जीवित प्राणी शामिल होतें हैं। अगर हम किसी रिश्ते को निभा नही पा रहें तो मान लीजिये की हम कहीं गलत हैं। हर इंसान अगर अपने वजूद को देखे तो समझ में आएगा की हमारा वजूद भी चंद रिश्तों की अदायगी का ही परिणाम है। जरा गौर कीजिये क्या रिश्तों को हम (रिसते ) तो नहीं बना रहें हैं। अगर आपका भी कोई रिश्ता सिसक रहा है तो देखिये आप कहाँ गलत हैं। जिन लोगों को अपने रिश्तों को लेकर किसी भी प्रकार का दर्द हो वो सम्पर्क करे। हम रिश्तों की पुनर्स्थापना में आपकी मदद करेंगे।
(आशुतोष पाण्डेय)

जरा देखिये ये क्या हो रहा है.

१३ दिसम्बर २००८ को हमने बैंक आफ बडोदा हल्द्वानी के द्वारा किए गए फर्जी ऋण घोटाले के बाबत लिखा था ईस घटनाक्रम में निम्न तथ्य सामने आए हैं। पढ़े पहली स्टोरी का ये भाग:
( इस हेतु हमने श्रीमती ग्रेस से यथा स्थिति जाननी चाही तो उन्होंने बताया कि डेढ़ साल पहले बैंक आफ बडोदा की पटेल चौक शाखा ने एक कर्मचारी की मिलीभगत से उनके मकान कि रजिस्ट्री पर किसी अन्य व्यक्ति को लोन दे दिया। जिसकी सूचना भी उन्हें नही दी गयी बैंक के कर्मचारियों ने उनसे यह कहकर ५ लाख का लोन किसी व्यक्ति को दे दिया श्रीमती ग्रेस को ६० हजार का लोन मंजूर किया गया है। और बैंक के एक कर्मचारी ने उन्हें घर बुलाकर मात्र ३५ हजार रूपये थमा दिए और कहा कि फाइल चार्ज और कागज तैयार करने में २५ हजार रूपये लग गए हैं। ये सब क्या हुआ और किसे हुआ इस बारे में ग्रेस कुछ भी नहीं जानती हैं। अब जब बैंक वाले मेरे घर पर पैसें जमा करने का तकाजा करने आयें तो पता चला कि मेरी घर कि रजिस्ट्री पर ५ लाख जैसा कि बैंक वालों का कहना है कि किसी अन्य व्यक्ति को लोन दिया गया है। ) ग्रेस को जो पैसे संजय बिष्ट से प्राप्त हुए उस हेतु एक स्टाम्प लिखवाया गया है ये स्टाम्प हल्द्वानी तहसील में बैठने वाली एक महिला अरज्निवेश द्वारा बकायदा अपने हस्ताक्षर से प्रमाणित किया गया है। लेकिन देखने वाली बात यह है की इसमे एक पक्ष्य के जब हमने श्रीमती ग्रेस से यथा स्थिति जाननी चाही तो उन्होंने बताया कि डेढ़ साल पहले बैंक आफ बडोदा की पटेल चौक शाखा ने एक कर्मचारी की मिलीभगत से उनके मकान कि रजिस्ट्री पर किसी अन्य व्यक्ति को लोन दे दिया। जिसकी सूचना भी उन्हें नही दी गयी बैंक के कर्मचारियों ने उनसे यह कहकर ५ लाख का लोन किसी व्यक्ति को दे दिया श्रीमती ग्रेस को ६० हजार का लोन मंजूर किया गया है। और बैंक के एक कर्मचारी ने उन्हें घर बुलाकर मात्र ३५ हजार रूपये थमा दिए और कहा कि फाइल चार्ज और कागज तैयार करने में २५ हजार रूपये लग गए हैं। ये सब क्या हुआ और किसे हुआ इस बारे में ग्रेस कुछ भी नहीं जानती हैं। अब जब बैंक वाले मेरे घर पर पैसें जमा करने का तकाजा करने आयें तो पता चला कि मेरी घर कि रजिस्ट्री पर ५ लाख जैसा कि बैंक वालों का कहना है कि किसी अन्य व्यक्ति को लोन दिया गया है। )
इस बावत जो वाकया सामने आया है एक संगठित अपराध की कहानी बयाँ कर रहा है। संजय बिष्ट से लिए पैसों के सबूत के तौर पर एक दस रूपये का स्टाम्प भी लिखा गया है। ये स्टाम्प हल्द्वानी तहसील में स्टाम्प बेचने वाली एक महिला के द्वारा प्रमाणित किया गया है। लेकिन विशेष बात ये है की इस स्टाम्प में कहीं भी संजय बिष्ट या उसके किसी प्रतिनिधि के हस्ताक्षर नहीं करवाए गए हैं। इस स्टाम्प की फोटो स्टेट प्रति श्रीमती ग्रेस को दी गयी है। इसमें जिन दो गवाहों का उल्लेख किया गया है उन का अता पता मालूम नहीं है। जब इस ब्लॉग के प्रतिनिधि आशुतोष पाण्डेय ने उस महिला से जाना ये कैसे हुआ तो वह महिला पहले तो मुकर गई। लेकिन बाद में उसने ये स्वीकार किया की ये स्टाम्प उसके द्वारा प्रमाणित किया गया है। ग्रेस इस बात को कहती है की ये महिला उनकी भतीजी है। एक जिम्मेदार महिला के द्वारा किया गया ये कृत्य क्या है? आज जब ग्रेस एक १० रूपये का स्टाम्प लेने गयी तो उन्हें इस महिला के द्वारा २७ नवम्बर २००९ की तारिख में बेचा १० रूपये का स्टाम्प थमा दिया। इस बारे में जब इनसाईट स्टोरी की टीम को पता चला तो उन्होंने इस हेतू इस महिला से बात करनी चाही तो इस महिला ने दो आदमी भेजकर हमें बकायदा धमकी दे डाली। लेकिन हमारा प्रयास जारी रहेगा हम आपको ऐसी तमाम घटनाओं से रूबरू करवाते रहेंगे जो कही न कही संगठित अपराध को संगठन बनाकर रोकेंगे हमारे साथ सुधी पाठकों का साथ सदा बना रहेगा। श्रीमती ग्रेस को आपके मानसिक साथ की आवश्यकता है। हमारा सहयोग उन्हें न्याय दिला सकता है। कृपया उनके सहयोग के लिए आगे आयें। हमें फोन करें। फोन 9258758804.
(आशुतोष पाण्डेय )