रविवार, 24 जुलाई 2011

इंजीनियरिंग कालेजों का काला सच

देश में जहां आई आई टी की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहें हैं वहीं दूसरी ओर प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेजों की भरमार देखने को मिल रही है, जब आई आई टी अपनी गुणवत्ता के मानक पर खरी नहीं उतर रही है तो इन इंजीनियरिंग कालेजों का क्या कहना? एक समय महानगरों तक सीमित ये प्राइवेट कालेज शहरों और कस्बों तक में खुल चुके हैं. विज्ञापन में सबसे उत्कृष्ट होने का दावा करने वाले कालेजों के पास एसी क्लास रूम और वाई फाई कनेक्टिविटी भले ही हो लेकिन अगर शैक्षणिक माहौल की बात करें तो ये शिफर नजर आतें हैं, इन कालेजों में लैब का तो सर्वथा अभाव ही दिखता है. तो फिर कैसे चल रहें हैं ये कालेज? दरअसल इन कालेजों में एडमिशन लेने वाले काफी बाद की रैंकिंग वाले वो छात्र हैं जो सरकारी कालेजों में प्रवेश नहीं ले पाए और वे इसे आशीर्वाद मान लेतें हैं. मनचाही फीस वसूलने वाले इन संस्थानों में फैकल्टी की भारी कमी है, और यू जी सी के मानकों को तांक पर रख मात्र बी. टेक.या एम. टेक योग्यता वाले अध्यापक इनका काम चला रहें हैं. इसके अलावा कुछ विजिटिंग फैकल्टी के नाम पर ये छात्रों को बेवकूफ बना ही लेते हैं और ये विजिटिंग भी महज साल में एक या दो क्लास ही लेतीं हैं. इस प्रकार इंजीनियर बनाने के ये कारखाने चल पड़ें हैं. अब सवाल ये है की ये तैयार इंजीनियरों की फसल कैसी होगी? और ये देश के विकास में क्या योगदान कर पायेंगे? ये कुछ ऐसे यक्ष प्रश्न हैं जिनका उत्तर भले ही हमारी व्यवस्था के पास ना हो लेकिन इन्हें नजर अंदाज कर पाना भी इतना आसान नहीं होगा. कल जब ये इंजीनियर देश की मुख्या धारा मेंशामिल होंगे तो क्या करेंगे. अगर इनके बनाए पुल गिरने लगे, पटरियां उखड़ने लगें और घर जान लेने लगें तो... दोष किसके सर मढ़ा जाएगा. इस व्यवस्था को या फिर जनता की किस्मत को जो इसकी शिकार बनेगी.

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

सभ्य समाज का सच

हल्द्वानी एक सेक्स रैकेट के खुलासे ने सभ्य समाज का नग्न रूप प्रस्तुत किया है. पिछले कुछ सालों में हल्द्वानी की फिजा इस कदर बिगड़ी है की ये अपराध नगरी के रूप में जाने जानी लगी है. भू माफियाओं और  रेत माफियाओं के लिए मशहूर हल्द्वानी अब अंडरवर्ल्ड के कार्यवाही और काल गर्ल सप्लाई केन्द्रों के रूप में  विकसित हो रही है. ये एक नया शगल नहीं है, दरअसल ये सिलसिला कई सालों से चल रहा है, कालगर्ल सप्लाई का और आश्चर्यजनक रूप से इसमें पत्रकारों और पुलिस की भूमिका भी इस कृत्य को और शर्मनाक बनाती है. हल्द्वानी के मुखानी कालोनी में पकडे गए सेक्स रैकेट जिसमें हल्द्वानी के अतिरिक्त दिल्ली और रामनगर की लडकियां  भी शामिल हैं इस कड़ी का एक नया शगूफा है, पिछले कुछ सालों से हल्द्वानी में सेक्स रैकेट खूब पनप रहा है, इसमें अधिकतर मध्यवर्गीय परिवारों से सबंधित महिलायें हैं, बाकायदा दलालों के जरिये सुनियोजित नेटवर्क के जरिये इस धंधे को किया जा रहा है, इस बार पकड़ी  गयी स्कैंडल सरगना बसन्ती बिष्ट पहले भी अपनी बेटी के साथ जेल जा चुकी है, शानदार एसी और सभी सुविधाओं से लैस हल्द्वानी की पाश कालोनी में रहने वाली बसन्ती ने आरोप लगाया है की एक स्थानीय पत्रकार और पुलिस अधिकारी को वो बाकायदा पैसा देती रहीं हैं... हल्द्वानी के पत्रकारों पर ऐसे आरोप पहले भी कई बार लग चुके हैं, लेकिन कभी कोई नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता है, आम आदमी की पोल खोलने वाले मीडिया का रूख ही ऐसा हो तो क्या किया जाय? असल में मीडिया भी इस बारे में ईमानदारी से काम नहीं कर रहा है. जहां सेक्स रैकेट की संचालिका का नाम तो सार्वजनिक कर दिया लेकिन पकड़ी गयी लड़कियों का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता है और नहीं इससे जुड़े ग्राहकों का नाम पता किसी को मालूम पड़ता है और लचर क़ानून के चलते जल्द ही सब आजाद हो जाते हैं. वैसे तो छोटी छोटी बातों पर सड़कों में आने वाली जनता भी इनका मूक समर्थन करती दिखती हैं. तभी तो कई बार पकडे  जाने के बाद भी इनका काम बदस्तूर जारी रहता है और सच तो यह है की इन्हें एक पहचान मिल जाती है.
(इनसाईट स्टोरी रोमिंग संवाददाता)

सोमवार, 20 जून 2011

इक्कीस वीं सदी का अंध विश्वास

२१वीं सदी और अंधविश्वास एक और माडर्न होने का दावा वहीं दूसरी ओर अंधविश्वासों की गिरफ्त. हम कहाँ हैं ये  सवाल एक यक्ष प्रश्न है, आज हम ऐसे ही एक अंधविश्वास से आपको दो चार करवा रहें हैं, उत्तराखंड में एक देव पूजन की विधि है "जागर" यह जागरण का ही एक रूप है जिसमें देवी देवताओं का आवाह्न किया जाता था, किसी भी शुभ अवसर पर इष्ट देव या ग्राम देव को पूजने की एक प्रथा थी, इसका उल्लेख कहीं न कहीं वैदिक साहित्य और अन्य अभिलेखों में मिलता है. लम्बे समय तक इसका स्वरुप इसी प्रकार का बना रहा लेकिन समय के साथ इसके रूप में परिवर्तन किया हुआ और इसे कई अंधविश्वासों के साथ जोड़ दिया गया, पूजा के साथ बलि और अन्य तमाम विधानों को जोड़ कर इसे पेट भरने और लोगों को भरमाने का जरिया बना दिया गया, आप आज उत्तराखंड के गाँव या कस्बों में ये खुले आम देख सकतें हैं की किस प्रकार कुछ लोग लोगों को भ्रमित कर अपना उल्लू सीधा कर रहें हैं. ये लोग चावल देख भूत काल की ५ पीढी से पहले की ऐसी घटनाएँ बताते हैं, जिन के बारे में इस पीढी को कुछ भी पता नही होता है, अधिकतर ये घटना किसी स्त्री के साथ हुए अन्याय से जुडी होती हैं. पांच पीढी या उससे पहले की घटनाओ को इतने सही तरीके के साथ प्रस्तुत किया जाता है की आम आदमी इस पर अनायास ही विश्वास कर लेता है, इसके बाद एक सिलसिला शुरू होता है पूजा पाठ और बलि का, इसमें "अहंकार पूजन", "रोष पूजन", "मृत आत्माओं का अवतार", "उनकी तृप्ति", मृत और अतृप्त आत्माओं की मंदिर बना स्थापना तक करवा दी जाती है. अक्सर देखा गया है की कोई परिवार एक बार इस में फंस जाय तो उसका निकलना मुश्किल ही होता है और आगे फंसता ही जाता है. एक बार पूजा करवाने के बाद फिर कह  दिया जाता है की पूजा में गड़बड़ हो गयी है, इन गड़बड़ियों की बानगी देखिये जैसे पूजा में काले मुर्गे की जगह सफ़ेद मुर्गा इस्तेमाल होना था, या फिर किसी के मन में कोई खोट था, या फिर पूजा जहां देनी थी, वहाँ नहीं दी गयी. लेकिन समाज इस जंजाल में इतनी बुरी तरह फंसा है की वो कोई सवाल पूछता ही नहीं है, जब पूजा करवाई जा रही थी तो आपके कहे अनुसार किया था तो गलत कैसे हो गया? अब ज़रा आपको इन पूजाओं  के सभी चरणों के बारे में बताएं सबसे पहले किसी चावल देखने वाले (जिसे पुछार या पुछयार कहतें हैं) के पास चावल लेकर जाना होता है, इसके बाद चावल देखकर उक्त व्यक्ति कोई भूत काल की कहानी सुनाता है जैसे आपकी पांच या सात पीढी पहले की कोई स्त्री की आत्मा भटक रही है जिसके साथ आपके पूर्वजों ने अन्याय किया था .इस पर विश्वास करना आसान भी हो जाता है क्योंकि कुछ समय पहले तक यहाँ बहु-विवाह प्रथा के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं. इसके बाद ये पुछ्यार करार रखने को कहते हैं और बताते हैं की ६ महीनों में इसकी पूजा करवानी होगी, छः माह के भीतर जागर लगानी होती है इस जागर में एक नाचने वाले और एक हुडका (उत्तराखंड का एक डमरू जैसा वाद्य) बजाने वाला (डंगरिया) आकर जागर लगाता है, इस प्रकार नाचने वाले व्यक्ति के शरीर में देवता का अवतार होता है और वो बताता है की किसी स्त्री के साथ जमीन, जायजाद, नपुंसकता, अंतिम संस्कार ना करने या फिर दूसरी शादी करने के कारण जो अन्याय  हुआ है उसी की बद दुआ के कारण उक्त स्त्री प्रेत रूप में भटक रही है यदि इसका इलाज नहीं किया गया तो परिवार के ऊपर विनाश का पहाड़ टूट जाएगा. फिर परिवार के लोग इसका निवारण पूछते हैं तो सभी को एक ही निवारण बताया जाता है जैसे, वो हरिद्वार जाकर इसका क्रिया कर्म करें फिर घर लौट कर जागर लगायें, और पूजा में इस आत्मा की तृप्ति के लिए  बकरे की बलि देने को कहा जाता है, इसके बाद एक साल के अन्दर अन्य कई पूजा करवाने को कहा जाता है, एक बार की इस पूजा का खर्च लगभग १० से ५० हजार तक आ जाता है. इतना सब करने के बाद कहा जाता है पिछली पूजा में कोई विधान गलत करवा दिया गया था, फिर से पूजा करवानी पड़ेगी. इस प्रकार ये अंत हीन सिलसिला चलता ही रहता है. इस प्रकार कई परिवार बर्बाद हो गए हैं, और कुछ लोगों का धंधा चल निकला है और सभ्यता और आधुनिकता का दावा करने वाला नवयुवा भी इसकी गिरफ्त में है, असल में उसे अनिष्ट की आशंका से इतना डरा दिया जाता है की वो अपना सब कुछ लुटाने को तैयार हो जाता है, जब हमने लोगों से उनके विचार जानना चाहे तो जो जवाब मिले वो लाजवाब थे, हमारा सवाल था की कैसे मान लेतें हैं कि ये सब सच है जवाब सुनिए कई चावल देखने वालों ने एक ही बात बतायी की किसी महिला के साथ हमारे पूर्वजों ने अन्याय किया था (वास्तव में सभी चावल देखने वाले एक ही बात बताते हैं, आप खुद इनके पास जाकर देख लें). दूसरा सवाल था कि ये पूजा गलत कैसे हुयी और उक्त आत्मा तृप्त क्यों नहीं हुयी? इसका भी उत्तर करीब करीब सामान मिला पूजा के किसी विधान को नही किया गया, या जैसा करना था वैसा नहीं हुआ. अब क्या करेंगे? इसका जवाब मिलता है फिर पूजा करनी है पिछली बार से इस बार बड़ी होगी. बलि की बात पर भी वो लोग अडिग दिखते हैं. लेकिन जब ये पूछा जाता है कि किसी की जान लेकर कैसे आप अपना भला कर लेंगें इस का कोई जवाब किसी के पास नहीं होता है. अब क्या इस समाज को सभ्य कहा जा सकता है. हम आत्मा या उसके अस्तित्व पर कोई बहस नहीं छेड़ना चाहतें हैं. आज वैज्ञानिक भी इसके स्वरुप को मान रहें हैं और सापेक्षिता के सिदधांत को देखें तो इनका अस्तित्व नकारा नहीं जा सकता है, दुनिया की पुरातन संस्कृति से लेकर आज का विज्ञान भी इसे जब स्वीकार कर रहा है तो इसके लिए कसौटी क्या हो ये सवाल अहम् हैं और दूसरा सवाल इस प्रकार लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ का है. अभी एक आत्मा की शांति के लिए ना जाने कितने जीवों की बलि दी जायेगी. क्या ये हो सकता है की एक जान लेकर कोई आत्मा शांत हो जाय? ये प्रश्न हम अपने सभी समाज के लिए छोड़ रहें हैं. 
(आशुतोष पाण्डेय और इनसाईट स्टोरी टीम ) 

मुंबई पुलिस की कहानी

इस देश की पुलिस कारगुजारियों की एक मिशाल देखिये, महाराष्ट्र पुलिस के दाउद के अँगुलियों की छाप मौजूद नहीं हैं, जबकि ये शातिर अपराधी कई बार मुंबई पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है. ये पुलिस की किस छवि को दिखाता है. मिड डे के रिपोर्टर की ह्त्या में दाउद का हाथ होने की खबर के बाद एक बार फिर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां दाउद के रिकार्ड खगालने में जुट गयी हैं. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के महानिदेशक एनके त्रिपाठी के अनुसार दाउद कई बार मुंबई पुलिस की गिरफ्त में रहा है, लेकिन उसके पास दाउद के फिंगर प्रिंट उपलब्ध नहीं हैं. अगर दाउद के फिंगर प्रिंट लिए गए होते तो आज उसके खिलाफ कार्रवाई करने में सहूलियत होती, एन के त्रिपाठी का ये खुलासा चौंका देने वाला तो है ही साथ ही पुलिस की छवि पर भी सवाल उठा रहें हैं. ये एक दाउद का ही मामला नहीं है बल्कि ऐसे हजारों मामले इस देश की पुलिस से जुड़े हैं जहां ये अपराधियों की सहायता करते नजर आते हैं. अब देखना ये है मुंबई पुलिस इस बारे में क्या सफाई पेश करती है, या फिर गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसिया क्या रूख अख्तियार करती हैं?
(आशुतोष पाण्डेय) 

गुरुवार, 16 जून 2011

कांग्रेस मुन्नी से ज्यादा बदनाम

अपने बयानों के कारण अक्सर  विवादों रहने वाले भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कांग्रेस को लादेन की औलाद कहने में भी गुरेज नहीं किया. साथ ही ये भी कह दिया कि कांग्रेस पार्टी मुन्नी से भी ज़्यादा बदनाम हो गई है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि जिस तरह सोनिया गांधी के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ संघर्ष की बात तो वे मज़ाक में कहते हैं कि ये ऐसी ही बात है जैसे पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष की बात करता है. कोलकाता में पार्टी के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुँचे नितिन गडकरी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह मां-बेटे की पार्टी है और बाक़ी सबकी  हैसियत नौकरों वाली है.
कांग्रेस पार्टी ने गडकरी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है और सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने को कहा है. पार्टी प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा कि गडकरी गटर की राजनीति कर रहे हैं. दूसरी ओर नितिन गडकरी के तेवर यहीं ठन्डे नहीं हुए. रामलीला मैदान में हुई कार्रवाई को रावणलीला करार देते हुए उन्होंने कहा कि ये सब सोनिया गांधी के आदेश पर हुआ था. गडकरी ने कहा, "हम इस मामले पर चुप नहीं बैठ सकते. भाजपा सरकार के इस अलोकतांत्रिक क़दम को बर्दाश्त नहीं करेगी." उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस की छवि ख़राब हो चुकी है और यह पार्टी अब मुन्नी से भी ज़्यादा बदनाम है.
(इनसाईट स्टोरी टीम)  

ये कट आफ: उफ़


सरकार और मानव संसाधन मंत्रालय के तमाम प्रयासों के बीच भी छात्रों को कालेज में प्रवेश के लिए कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है, कल दिल्ली के श्रीराम कालेज आफ कामर्स की कट आफ लिस्ट देखकर छात्रों के होश पाख्ता हो गए हैं इस साल जारी पहली कट आफ लिस्ट १०० फीसदी की है, कालेज के इस रवैये की चारों ओर भर्त्सना  हो रही है. कॉलेज की मंगलवार को जारी सूची के अनुसार, जिन छात्रों के पास 12वीं में बिजनेस स्टडीज, गणित, एकाउंटस और अर्थशास्त्र में से कोई विषय नहीं है तो उनके लिए बीकॉम में दाखिले के लिए सौ फीसदी कट ऑफ रखा गया है. साधारणतया इस सूची में विज्ञान के छात्र आते हैं. सिब्बल ने इस के लिए दिल्ली विश्विद्यालय के कुलपति को तो तलब किया ही साथ ही ये भी माना की देश में गुणवत्तापूर्ण कालेजों की कमी के चलते ये स्थिति पैदा हुयी है. इस प्रकार ९७-९८ फीसदी अंक लाने वाले छात्र भी प्रवेश से वंचित रह जायेंगे. सरकार को चाहिए की वह परीक्षा प्रणाली को सरल कर छात्रों को अधिक अंक लाने में सहायता करने के बजाय वास्तव में बुद्धिमान छात्रों को प्रोत्साहित करे. लेकिन सरकार केवल परीक्षा प्रणाली को सरल कर छात्रों को आकर्षित तो कर ले रही है लेकिन  इस तैयार भीड़ को खान समायोजित किया जाय इसके लिए कोई कदम उठा ही नहीं रही है. जब हमने छात्रों से इस बारे में बात की तो उनका कहना था की सब १०० प्रतिशत तो हो नहीं सकते हैं. अभी हाल के महीनों महीनों में रीलिज फिल्म फ़ालतू में विषय को काफी गहराई से दिखाया गया है. 
(इनसाईट स्टोरी कैम्पस टीम )

काग्रेस को राहत: रिलायंस की माफी

पी. चिदम्बरम 
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (आरआईएल) ने अपने कर्मचारी के.आर. राजा की अपमानजनक टिप्पणी के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम से माफ़ी मांगी है. दरअसल आरआईएल के एक कर्मचारी ने पी चिदंबरम के बारे में कहा था कि उन्हें भी 2-जी स्पैक्ट्रम घोटाले में लाभ मिला है. इस पर गृह मंत्री ने क़ानूनी नोटिस भेज दिया था. इस नोटिस के जवाब में आरआईएल के ग्रुप प्रेसिडेंट वी बाला सुब्रमण्यम ने कहा है कि लॉबिस्ट नीरा राडिया के साथ बातचीत में उनके एक कर्मचारी केआर राजा ने गृह मंत्री के ख़िलाफ़ अपमानजनक और अनुचित टिप्पणी की थी. सुब्रमण्यम ने गृह मंत्री पी चिदंबरम के वकील को पत्र लिखकर कहा है कि राजा को उनके आधारहीन और ग़ैर ज़िम्मेदाराना बयान के काफ़ी फटकार लगाई गई है. उन्होंने कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ इस घटना पर खेद व्यक्त करते हुए माफ़ी मांगती है. केआर राजा ने भी चिदंबरम के वकील को अलग से पत्र लिखकर माफ़ी मांगी है. इस पत्र में उन्होंने कहा है कि नीरा राडिया के साथ बातचीत में उन्होंने बिना किसी आधार के चिदंबरम पर अपमानजनक टिप्पणी की थी, इसलिए वे इस मामले पर माफ़ी मांगते हैं.दरअसल के.आर राजा और नीरा राडिया के बीच हुई बातचीत मीडिया में लीक हो गई थी. जिसके बाद चिदंबरम के वकीलों ने राजा को क़ानूनी नोटिस देते हुए माफ़ी मांगने को कहा था. इन मीडिया रिपोर्टों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने 2-जी घोटाले में फ़ायदा उठाने का आरोप लगाते हुए चिदंबरम से त्यागपत्र की भी मांग की थी. इसके बाद शायद कांग्रेस ने राहत की सांसे ली होंगी क्योंकि २ जी घोटाले को लेकर सरकार और पार्टी पहले से ही कटघरे में खडी थी. 
(आशुतोष पाण्डेय)

शनिवार, 11 जून 2011

इनसाईट स्टोरी का सच

फ़ाइल फोटो: रामदेव-अन्ना हजारे 
आखिरकार इनसाईट स्टोरी की मुहिम जो ये साबित करना चाह रही थी की रामदेव का आन्दोलन मात्र एक शिगूफा है, आज अन्ना हजारे ने भी इस पर मुहर लगा दी, टाइम्स आफ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा की रामदेव योग गुरु हैं और वो ही बने रहें, किसी बड़े आन्दोलन को लीड करने की हिम्मत उनमें नहीं है, सामाजिक कार्यों के लिए कई अनुभवों की जरूरत होती है जो अभी उनके पास नहीं हैं. 
यह पूछने पर कि उन्होंने बाबा के आंदोलन से दूरी क्यों बना ली है, अन्ना ने कहा कि अपने आंदोलन में हम सभी के विचारों को सुनते हैं, चर्चा करते हैं और उसके बाद मिलकर कोई फैसला लेते हैं, लेकिन बाबा इस तरह नहीं सोचते। वह अकेले ही सारे फैसले लेते हैं। यही कारण है कि कई बार अपनी बातों ने उन्होंने अनजाने में ही सरकार को ही फायदा पहुंचाया है। उन्होंने कहा की रामदेव की लड़ाई भी भ्रष्टाचार को लेकर है लेकिन तरीका ठीक नहीं है, यही बात इससे पहले कई कांग्रेसी नेता और समीक्षक भी कह चुके हैं. ये बात सही है की रामदेव की इस कार्रवाई से अन्ना की लड़ाई को काफी नुकसान पहुचा है. यही बात हम लगातार अपने आलेखों में कहते रहें हैं. 
(आशुतोष पाण्डेय)

एक नया विवाद और कांग्रेस

रामदेव से ट्रस्ट का हिसाब किताब मागने वाली कांग्रेस अब खुद एक विवाद में फंस गयी है, ताजा ख़बरों के मुताबिक़ प्रधानमंत्री की चंडीगढ़ की संपत्ति की कीमत आधी से भी कम आंकी गयी है, आज जब प्रधानमंत्री की सम्पत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया गया तो उस पर ये नया विवाद खडा हो गया और प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर सफाई भी पेश कर डाली की ये चार साल पुरानी कीमत बताई गयी है, लेकिन ये बात हजम नहीं हो रही है की जिस ब्योरे को आज जारी किया गया है उसमें चार साल पुरानी कीमत बताने का औचित्य क्या है? मनमोहन सिंह के पास चंडीगढ़ में एक घर है, जिसकी कीमत को लेकर ये नया विवाद खड़ा हुआ है, वैसे ही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बदनाम इस सरकार की मुसीबत बढ़ने को ये काफी है, अब चाहे प्रधानमंत्री कार्यालय कोई भी सफाई दे लेकिन जवाबदेही तो सरकार और खुद प्रधानमत्री की भी बंटी है, क्योंकि ये मामला खुद उनकी अपनी संपत्ति को लेकर है. देखना ये है की अब सरकार और प्रधानमंत्री का क्या रूख होता है?
(आशुतोष  पाण्डेय) 

टूटेगा रामदेव का अनशन!

अब जल्द ही रामदेव के अनशन छोड़ने के आसार नजर आ रहे हैं, कल १० जून को एकाएक तबियत खराब हो जाने के कारण उन्हें उत्तराखंड सरकार की सहमति से प्रशासन ने अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था झा लीवर में संक्रमण हो जाने के कारण उन्हें आई सी यू में रखना पडा था, आज पुन: श्री श्री रविशंकर रामदेव से मुलाक़ात करने पहुचे हैं, विश्वस्त सूत्रों की मानें तो एक केन्द्रीय मंत्री के विशेष आग्रह पर रविशंकर ये पहल कर रहे हैं. इससे पहले भी रविशंकर उनसे अनशन तोड़ने की अपील कर चुके हैं. लेकिन एक बड़ा वर्ग इसे रामदेव की हार ही मान रहा है... उनके समर्थक इस बात से व्यथित हैं की उत्तराखंड सरकार उन्हें जबरन उठा कर ले गयी, और अनशन तुडवाने की नियत से अस्पताल में ले जाया गया, उनके समर्थक कई जगह इसके लिए प्रदर्शन भी कर चुके हैं और कई सड़कों पर जाम भी लगाएं हैं. अगर रामदेव अपना अनशन बेनतीजा ख़त्म करतें हैं तो उनके समर्थकों के बीच एक नकारात्मक सन्देश जाएगा. लेकिन उत्तराखंड की सरकार भी ये नहीं चाहती है की कोई बबंडर यहाँ खडा हो. इसलिए भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेता जो रामलीला मैदान में उनके अनशन को समर्थन दे रहे थे अब उनसे अनशन छोड़ने की अपील कर रहें हैं. 
(देहरादून इनसाईट स्टोरी टीम अपडेट)

सोनिया राहुल की वेब साईट हैक


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र की वेबसाइट्स को हैकर्स ने अपना निशाना बनाया है. रायबरेली व बरेली की वेबसाइट्स से कई दस्तावेज चुराए जाने की आशंका है. अभी तक किसी प्रकार के दस्तावेज चोरी होने या अन्य किसी प्रकार की कोई खबर नहीं आयी है. अभी इस मामले की जांच में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल जुट गई है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अमेठी और सोनिया गांधी रायबरेली के लोगों से सीधे संपर्क बनाए रखने के लिए इन वेबसाइट्स का उपयोग करते थे. इसमें क्षेत्र के लिए योजनाओं और विकास कार्यों के बारे में पूरी जानकारियां थीं. पुलिस ने मामले को गंभीर और गोपनीय मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है. मामले में अदालत में एफ आई आर एक बंद लिफाफे में पेश की गई. फिलहाल पुलिस सूत्रों के अनुसार इतना ही खुलासा हो पाया है कि से वेबसाइट्स डोमेन से हैक की गई हैं. 
(इनसाईट स्टोरी टीम नई दिल्ली)   

बी.पी.एल पेंशन के लिए उम्र ६५ से ६० की

नई दिल्ली. सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) रह रहे बुजुर्गो के लिए पेंशन की आयु सीमा 65 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष कर दी है। इससे बीपीएल श्रेणी के 60 से 64 वर्ष की आयु वाले 72.32 लाख लोग लाभान्वित होंगे। ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्ध पेंशन योजना’ के तहत लाभान्वितों की आयु सीमा कम करने का यह निर्णय केंद्रीय कैबिनेट ने लिया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में 80 वर्ष और उससे अधिक आयु वाले वृद्धों को प्राप्त होने वाली पेंशन की दर में भी बढ़ोतरी करने को मंजूरी दी गई है। अब 80 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले बुजुर्गो को 500 रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे। पहले तक यह दर 200 रुपए मासिक थी। इस फैसले से इस आयुवर्ग वाले 26.49 लाख लोग लाभान्वित होंगे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय किया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बताया कि यह परिवर्तन इस साल 1 अप्रैल से लागू होंगे। 2,770 करोड़ अतिरिक्त खर्च : बीपीएल श्रेणी के 169 लाख लोग 65 वर्ष से अधिक आयु के हैं जिन्हें पेंशन का लाभ मिल रहा है। 60 से 64 वर्ष तक की आयु वाले लोगों को वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत प्रतिमाह 200 रुपए पेंशन देने से सरकार पर 1,736 करोड़ रुपए का बोझ आएगा। 80 वर्ष से अधिक आयु वालों को 500 रुपए पेंशन से सरकारी खजाने से 953 करोड़ खर्च होंगे। इस तरह संशोधित योजना से सरकार पर 2,770 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। 
(इनसाईट स्टोरी के लिए, सुषमा पाण्डेय) 

रामदेव विवाद: कांग्रेस दोफाड़

बाबा  रामदेव के मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच पहले दिन से ही दोफाड़ की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस के मुखपत्र ‘कांग्रेस संदेश’ के ताजे अंक में सरकार के उन चार मंत्रियों की तीखी आलोचना छपी है, जो बाबा रामदेव से मिलने एयरपोर्ट गए थे। इस पत्रिका को वितरण केन्द्रों से ही वापस मगा लिया गया है. संदेश के संपादकीय में चार मंत्रियों के  हवाई अड्डे पर जाने के सवाल पर प्रश्नचिंह लगाया गया है. संपादकीय में कहा गया कि हालांकि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सिविल सोसायटी की मांगों पर सहानुभूति से विचार करे लेकिन चुनी हुई सरकार की पूरी मर्यादा रखी जाना चाहिए और सरकार के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। पत्रिका के संपादक अनिल शास्त्री हैं। जैसे ही यह मामला वरिष्ठ नेताओं की जानकारी में आया, इसका वितरण रोक दिया गया है। नेताओं ने संपादक अनिल शास्त्री के साथ बैठक भी की, लेकिन उसमें कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। अनिल शास्त्री भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लालबहादुर शास्त्री के बेटे हैं। हालांकि बाबा रामदेव के मुद्दे पर पार्टी नेता दिग्विजय सिंह शुरु से ही रामदेव विरोधी लाइन पर चल रहे हैं, लेकिन सरकार ने उन्हें अनशन न करने से मनाने की पूरी कोशिश की। चार मंत्री एयरपोर्ट पर गए और उनसे बातचीत की। हाल ही में दिग्विजय सिंह ने फिर एयरपोर्ट गए सभी मंत्रियों पर अंगुली उठाई थी. यह संभवतः पहली बार है कि करीब एक दशक से प्रकाशित हो रही इस पत्रिका में छपे लेख या संपादकीय के कारण विवाद हुआ है. माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को न तो मंत्रियों के एयरपोर्ट पर जाकर बाबा रामदेव से मिलने की जानकारी थी और न ही रामलीला मैदान पर हुई पुलिसिया कार्रवाई पर उन्हें विश्वास में लिया गया। वे इस मुद्दे पर मंत्रियों के साथ हुई बैठक में अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुकी हैं। 
(इनसाईट स्टोरी नई दिल्ली) 

रामदेव की हालत सुधरी

भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन कर रहे योग गुरु की सेहत में अब पहले के मुकाबले सुधार है। उन्हें कल यहां अस्पताल में सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती कराया गया था, लेकिन अब वह गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) से बाहर हैं. हिमालयन अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसएल जेठानी ने बाबा रामदेव के आईसीयू से बाहर किए जाने की जानकारी दी. बाबा को ग्लूकोज चढ़ाया गया, जिसके बाद उनकी हालत में सुधार आया. रामदेव अब बातचीत भी कर रहे हैं. इससे पहले जेठानी ने कहा कि रामदेव के यकृत में थोड़ी गड़बड़ी आई थी लेकिन गुर्दा सामान्य रूप से काम कर रहा है. वह होश में हैं. उनका रक्तचाप 110:78 है और नाड़ी की गति 60 है. उन्होंने कहा कि वह बात कर रहे हैं और कोई दिक्कत नहीं है. उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है. देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जीएस मार्तोलिया ने कहा कि 46 वर्षीय योग गुरु को अस्पताल लाने के तुरंत बाद आईसीयू में भर्ती कराया गया जहां चिकित्सकों की दो टीम ने उनका परीक्षण किया. चिकित्सकों ने बताया कि रामदेव को नस के जरिये ग्लूकोज और सामान्य सलाइन दिया जा रहा है जिसके बाद उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है.
(इनसाईट स्टोरी टीम हरिद्वार) 

शुक्रवार, 10 जून 2011

बाबा की हालत बिगड़ी, आईसीयू में भर्ती

काले धन के मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे योग गुरु बाबा रामदेव को शुक्रवार को स्थिति बिगड़ने पर हरिद्वार से करीब 25 किलोमीटर दूर जालीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डाक्टरों की एक टीम ने उनके स्वास्थ्य की गहन जांच पड़ताल की। हिमालयन अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डाo दीपक गोयल ने बताया कि सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती रामदेव के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है और उनकी कई प्रकार की जांच कराई गई है। हालांकि उनका स्वास्थ्य सामान्य है लेकिन ऐसे मामलों में जब तक पूरी जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।इस बीच आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रामदेव के शरीर में पानी की कमी देखते हुए उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया गया है। इसके पूर्व रामदेव के यहां पहुंचते ही डाक्टरों ने उनका उपचार शुरू कर दिया। हिमालय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एसएल जेठानी ने बताया कि रामदेव के अस्पताल पहुंचते ही उनका इलाज शुरू कर दिया गया। उन्होंने रामदेव की स्थिति के बारे में तुरंत कोई टिप्पणी करने से इन्कार किया और कहा कि इलाज के बाद ही रामदेव के स्वास्थ्य के बारे में कोई टिप्पणी की जा सकती है।रामदेव को हरिद्वार योगपीठ में अनशन स्थल से कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल लाया गया। हिमालयन अस्पताल की ओर से शाम को जारी मेडिकल बुलेटिन में कहा गया कि रामदेव के स्वास्थ्य में कुछ सुधार हो रहा है। वह पूरी तरह होश में हैं। उनके गुर्दे ठीक तरह से काम कर रहे हैं लेकिन यकृत में कुछ समस्याएं हैं।बुलेटिन में कहा गया कि रामदेव की विभिन्न तरह की स्वास्थ्य जांच की गई हैं। उनके स्वास्थ्य पर पूरी नजर रखी जा रही है, वहीं दुसरी और रामदेव के समर्थकों में सरकार को लेकर रोष बढ़ता ही जा रहा है.  
(इनसाईट  स्टोरी टीम देहरादून )   

सोमवार, 6 जून 2011

ये आन्दोलन सेलिब्रिटी के साथ

आज देश भारी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, जहां केंद्र और राज्य सरकारें घोटालों में लिप्त हैं और देश का बुद्धिजीवी वर्ग आन्दोलनों में व्यस्त है, भ्रष्टाचार का भूत देश की गर्दन पर सवार है, पंचायत से लेकर संसद और प्रधानमंत्री तक सभी की कहीं ना कहीं मौन स्वीकृति है इस सब को. केंद्र सरकार इस दुनिया की सबसे भ्रष्ट सरकार है, लेकिन जनता है की मानती ही नहीं, कलमाडी, ए. राजा को जेल जाना पड़ा है. लेकिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री को तो भा ज पा हाईकमान तमाम सबूतों के बाद भी दोषी नहीं मान रहा है, अब बात ब.स.पा. की खुद मायावती के खिलाफ दर्जनों भ्रष्टाचार के आरोप हैं, पश्चिमी बंगाल की सरकार जिसे तीन दशकों से जनता का वरदहस्त था, यू. पी.ए. समर्थित और केंद्र सरकार में रेलवे मंत्री ममता बनर्जी के सामने ढह गयी. अब फिर रामदेव ने काले धन को लेकर सरकार पर हल्ला बोला तो जनता फिर उद्वेलित हुयी, लाखों लोग सारे देश में रामदेव के साथ आये, लेकिन रामदेव तो अनशन में बैठने से पहले ही सरकार से एक डील कर चुके थे, भले ही बाद में वो कहें की ये सब जबरदस्ती लिखवाया था, जब आप के साथ जबरदस्ती हुयी तो आपने जनता के पास आ इसका खुलासा क्यों नही किया? लेकिन वे इसका जवाब क्यों दें क्योंकि ये सवाल कोई पूछे तब ना, इस देश में तमाशाई बहुतेरे हैं, किसी भी जलसे या रैली में लाखों की भीड़ यूं ही इकठ्ठी हो जाती है, और इसमें अधिकतर चेहरे तो हर जगह पाए जातें हैं, रामदेव ने भी बुलाया लोग चले आये, सब मानते हैं की आन्दोलन हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है, लेकिन क्या ये सब लोग तब भी जातें हैं जब इनके बगल में भ्रष्टाचार होता है, किसी की इज्जत लुटी जाती है, इस देश की जनता को आन्दोलन करने के लिए सेलिब्रेटी चाहिए, चाहे वो राहुल गाँधी हों, अन्ना हों, रामदेव या फिर कोई और कुछ ख़ास असर नहीं बस आन्दोलन होना चाहिए, चाहे वो दिल्ली का रामलीला मैदान में हो या फिर किसी नेशनल हाईवे को जाम कर किया जाये, अब बात करें अपनी दिल्ली की ये दिल्ली भी ना, सब यही होगा कामनवेल्थ से लेकर धरना तक, और आज कल दिल्ली में एक नया समाज बना है फेसबुकिया समाज, अरे भाई इस समाज के पास विचारों का भण्डार है.. और अपना रूतबा दिखने का शौक भी, बस शुरू हो जाता है ये समाज अपने विचार गढ़ने, हर मुद्दे पर पर अपनी वेबाक राय देने के लिए तो अब ये विख्यात हो गया है, ये फेसबुकिये भी ना किसी भी सेलिब्रिटी के साथ खुद का नाम जोड़ने के लिए बेताब है पहले अन्ना के साथ फोटो अपलोड किये, अब नया बुखार रामदेव का चढ़ गया, ४-५ जून को सरकार ने रामदेव को हटाने के लिए जो किया उसे जलियावाला कह डाला सबने. सरकार ने जो किया वह तो अशोभनीय है और रहेगा भी, लेकिन यदि रामदेव ने सरकार के द्वारा किये गये धोखे को जनता के सामने रख दिया होता तो शायद ये हालात नहीं आते और सरकार की अच्छी फजीहत भी होती, खेल तो रामदेव ने भी खेला. बस जनता अभी समझी नहीं है, सत्याग्रह के लिए आर.एस.एस का साथ, क्या गांधी के देश में ये होना चाहिए था? हाँ गाँधी को मरे तो साल हो गए वो कौन सा सेलिब्रेटी हैं, जो जनता रामदेव से ये पूछती. जिस झूठ को छिपा रामदेव सत्याग्रह के लिए आये वो झूठ तो किसी को दिखता ही नहीं, क्या ये भ्रष्ट आचरण नहीं था? ए राजा और कलमाडी को तो जेल भेजा गया और रामदेव को चार्टर्ड विमान से उनके आश्रम में छोड़ा गया. ये सरकार केंद्र वाली वास्तव में भ्रष्ट है, तभी तो भ्रष्ट काम के लिए किसी को जेल तो किसी को बाकायदा विमान की सेवा.
देश में अस्थिरता ना हो इसके लिए सरकार के चार-चार मंत्री रामदेव के पास गए, रामदेव ने कहा भी की उनकी मांगें मान ली गयी हैं बस इस बात से भा ज पा नाराज हो गयी होगी और रामदेव को सरकार के साथ किया करार तोड़ना पड़ा. ये भ्रष्ट सरकार है जो हर बेईमान के साथ करार कर लेती है. कामन वेल्थ घोटाला देखो कितने बेईमानों को ठेका दिया. अब सरकार को चाहिए की एक सेंसर तैयार करवाए जो बेमानों को देखते ही बोलने लगे मेटल डिटेक्टर की तरह करप्सन डिटेक्टर, हमारे आई आई टी के छात्रों से लेकिन वहां भी समस्या, जयराम का कहना है की वो विश्वस्तरीय नहीं हैं. अब ऐसा करते हैं जहां सब एक मत हैं किसी को कोई परेशानी नहीं वहा की बात करें अरे कुछ दिन पहले मुन्नी बदनाम हुयी और कई अवार्ड ले गयी, अब सरकार बदनाम हो रही है, शीला भी तो जवान हुयी थी, वो भी हिट थी अब भ्रष्टाचार जवान है तो... हल्ला मच गया. चलिए सब हो गया अब देश की सोचतें हैं, ये देश हमारा है, ये ना रामदेव से सुधरेगा ना इस सरकार से बिगड़ेगा, इसे सुधारना और बिगाड़ना हमारे हाथों में है, कुछ करो इस देश के लिए, फेसबुक पर पोस्ट कर सेलिब्रिटी बनाना बंद करो.
(आशुतोष पाण्डेय)

शनिवार, 4 जून 2011

एक नया शगूफा है रामदेव का अनशन

भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार .... ये इस देश की नियति बन गया लगता है... सब इसकी अंगीठी पर अपने हाथ सेक रहें हैं, कोई लोकपाल की मांग करता है तो दूसरा ये पूछ लेता है की क्या गारंटी है की लोकपाल ईमानदार ही होगा? कोई काले धन को लेकर आंदोलित है. ख़ास बात है की ये सब जनता का साथ मांग रहें हैं. अन्ना हजारे के अनशन के बाद लोकपाल पर एक समिति का गठन तो कर दिया गया लेकिन गठन के समय से ही ये एक विवाद का कारण बन गयी थी, पहले भूषण परिवार को लेकर फिर प्रधानमंत्री और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को इस के प्रभाव से बाहर रखने के कारण खासा विवाद है, सरकार और अन्ना के समर्थकों के बीच एक मल्ल युद्ध जारी है, ६ जून को इसका जिन्न बाहर आने वाला है, खैर आज का बड़ा मुद्दा किसी समय योग गुरु रहे रामदेव बाबा का आज ४ जून से शुरू होने वाला अनशन है, रामदेव की मांगें तो बहुत हैं लेकिन सबसे बड़ी मांग में शामिल है, विदेशी बैंकों में रखा काला धन की वापसी. सरकार के मंत्री तो बाकायदा एयर पोर्ट पर भी रामदेव की वन्दना कर चुकें हैं, पर रामदेव हैं की मान ही नहीं रहें हैं, अब एक करोड़ लोगों के साथ अनशन में बैठने की चेतावनी दें, उन्होंने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. अब एक नया मोड़ देखें कल केन्द्रीय मंत्रियों के साथ हुयी एक बैठक का हवाला  देते हुए रामदेव ने कहा था "काफी मुद्दों पर सहमति हो गयी है है, सरकार काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने पर राजी तो हो गयी है, लेकिन ऐसा कोई विधेयक लाने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है". रामदेव जी ये क्या आपका ये बयान आपके समझ में आया, सरकार क्या करेगी क्या नहीं ये तो बाद में पता चलेगा लेकिन एक सवाल ये काला धन कहाँ है, कितना है, इस पर भी आप के पास सिवाय कयास के कुछ नहीं है, और क्या ये इतना आसान होगा, जिन देशों के बैंकों में ये पैसा है क्या वो इसे आसानी से वापस कर देंगे? और क्या अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों में ये प्राविधान हैं? क्या दुनिया भर के पैसों को जमा करने वाले इसकी जानकारियाँ देकर अपनी साख गिरायेंगें ऐसा तो लगता नहीं हैं. हाँ सरकार इसके लिए प्रयास भर जरुर कर सकती है और करने भी चाहिए. दरअसल अगर सच कहा जाए, आम आदमी भी इस मुहिम में मात्र साथ भर देने को जुड़ा है. इस देश में कितने लोग हैं जो अपना असल टैक्स जमा करतें हैं, कितने हैं जो सरकारी सुविधाओं की धज्जियां नहीं उडातें हैं, कितने प्रतिशत लोग हैं जो अपराधियों को वोट नहीं देतें है, आज अगर ख़ास लोगों पर शिकंजा कसेगा तो उनका कानूनी पलटवार आम जनता पर ही होगा... फिर तो सब भ्रष्टाचारियों को सजा मिले जो ख़ास है आम हैं, जो संसद के चुने नुमायंदे हैं या फर्जी बी पी एल कार्ड बनवाने वाले तथाकथित गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोग, मान लिया राजनेता अनैतिक हैं, तो जनता उन्हें वोट क्यों दे रही है? तमिलनाडु में जयललिता के दामन पर तमाम दाग रहें हैं, पश्चिमी बंगाल में  ममता की ताजपोशी जो की अब तक की दुनिया की सबसे भ्रष्ट सरकार का हिस्सा है,को बहुमत क्या है? क्या रामदेव या अन्ना जनता की इस मंशा को नहीं जानतें हैं, इतने बड़े आन्दोलन खड़े करने की कुव्वत रखने वाले ये समाजसेवी (इस शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं? ) इतने मासूम तो नहीं हैं? पहले उन एक करोड़ की गारंटी दो बाबा जो आपके साथ अनशन में बैठे हैं, की वे सब ईमानदार हैं. अब भी कुछ बुद्धिजीवी अपनी फोटो खिचवाने जरुर जायेंगें, फिर अखबारों की कटिंग, टी वी बाइट्स सब का रिकार्ड रखेंगें. कुछ अन्ना के साथ चमके, कुछ बाबा के साथ भी चमक जायेंगें.... कुछ तो दो तीन दिन पहले से ही सुपर रिन की चमकार से सराबोर हैं,  लेकिन ये मुआ भ्रष्टाचार बढ़ता ही जाएगा जब तक इस देश का आम आदमी ना सुधर जाए और वो ना सुधरने वाला. अगर वास्तव में इस देश से भ्रष्टाचार मिटाना है तो एक क़ानून बने की है व्यक्ति प्रतिदिन देश के लिए एक घंटे से तीन घंटा अनिवार्य शारिरीक, मानसिक योगदान करे इसमें आम से लेकर प्रधानमंत्री तक को शामिल किया जाय, हर व्यक्ति को आर्मी में सेवा करना अनिवार्य कर दिया जाय कितने समाज सेवी इसके लिए तैयार हैं? ये सवाल है उन लोगों से जो देश को अनशन, धरनों, जलूसों से अस्थिर कर रहें हैं. इतनी देर देश के विकास के लिए काम करो फिर देखो ६ माह में इस देश की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल जायेगी.

(आशुतोष पाण्डेय)


शुक्रवार, 27 मई 2011

वो घिनौना चेहरा आपका ही ना हो:फर्जी प्रमाणपत्रों का सच

जहां इस देश के नेता घोटालों में व्यस्त हैं, वहीं आम आदमी भी कहीं पीछे नहीं है, टैक्स की चोरी से लेकर फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिये सरकारी नौकरी पा लेने का खुला खेल भी देश में चल रहा है, अभी एक ताजा मामला उत्तराखंड के नैनीताल जिले का सामने आया है, यहाँ एक अध्यापक ने फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिये पांच साल सरकारी नौकरी कर ली, अब किसी व्यक्ति के द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना मागने पर ये सच सामने आया है की उसकी एम. ए. और बी. एड. की मार्कशीट ही फर्जी थी जिसका कोई रिकार्ड सम्बंधित विश्वविद्यालय के पास था ही नहीं, ये तो वह मामला है जो पकड़ में आ गया, ऐसे हजारों मामले हर साल होतें हैं जिसमें एक संगठित माफिया काफी सधे तरीके से काम करता है, बाकायदा एजेंटों और आफिस बनाकर काम करने वाले इन माफियाओं के  तार विभिन्न बोर्डों के अधिकारियों से लेकर राजनेताओं और पुलिस तक से जुड़ें रहतें हैं, ये माफिया भी दो तरह के हैं एक वो जो पूरे कायदे -कानूनों के अनुसार काम करतें हैं इनकी प्रवेश से लेकर परीक्षाफल आने तक की सारी जिम्मेवारी होती है, इनके पास नक़ल कराने और दुसरे छात्र को बिठा परीक्षा दिलाने तक की व्यस्था होती है. ये हाल किसी एक शहर या बोर्ड का नहीं है, सारे देश इस प्रकार के माफिया खुले आम अपनी बिसात बिछाए घूम रहें हैं, १० वीं से लेकर बी. एड तक कोई भी डिग्री या कोर्स हो ये करवा देतें हैं, इसके लिए ग्राहकों की कोई कमी भी नहीं होती है, दुसरे प्रकार का माफिया वो है जो फर्जी मार्कशीट खुद तैयार करता है और बेचता है इनके द्वारा दिए गए सभी प्रमाण पात्र नकली होतें हैं, फिर भी हजारों लोग हर साल इनकी सेवा लेतें हैं. इस प्रकार के माफिया बोर्ड के लोगो और मुहर की नक़ल कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने में माहिर होतें हैं. समय समय पर इन लोगों की गिरफ्तारियां भी होती हैं लेकिन किसी पुख्ता क़ानून के ना होते ये जल्द ही  बरी हो जातें या जमानत पर आ जातें हैं, सवाल ये नहीं है की ये इतना बड़ा फर्जीवाड़ा करते कैसे हैं असल सवाल तो ये है की आखिर इन्हें काम करवाने वाले मिलते कहाँ से हैं, अभी कुछ दिन पूर्व एक एयर लाइंस के पायलट के पास फर्जी लाइसेंस मिला था. इसके अतिरिक्त फर्जी डोमिसाइल, बी पी एल कार्ड बनाने और बनवाने वालों की कमी नहीं हैं, हर साल फर्जी डोमिसाइल के चलते सैकड़ों छात्रों का प्रवेश निरस्त हो जाता है. फर्जी डाक्टर, फर्जी इंजीनियर से लेकर फर्जी नेता सभी पाए जातें हैं इस दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में. आगे हम आपको सुनायेंगें कुछ दास्तान जिसके चलते आप देखेंगे इस दुनिया का घिनौना चेहरा, लेकिन ध्यान रहे कहीं हमारी अगली मुहिम आपकी दास्तान ना कह रही हो. वो घिनौना चेहरा आपका ही ना हो. 
पड़ताल: (इनसाईट स्टोरी टीम) 
आलेख: आशुतोष पाण्डेय 

अमेरिका पाकिस्तान का समधियाना

हिलेरी क्लिंटन
अमेरिका और पाक का समधियाना किसी के समझ नहीं आता है, एक और जहां अमेरिका कभी खुल कर इस बात को स्वीकार करता है की पाकिस्तान आंतक की शरणस्थली है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति से लेकर विदेश मंत्री तक चाटुकारिता करते नजर आतें हैं, २७ मई २०११ को अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन एक विशेष अनुरोध को लेकर इस्लामाबाद पहुचीं हैं. दो मई को लादेन के मारे जाने के बाद से पाकिस्तान सरकार अमेरिकी कार्रवाई के तौर- तरीकों की निंदा करता रहा है, इसके साथ ही चरमपंथी मुसलमानों का एक गुट भी अमेरिका को परिणाम भुगतने की चेतावनी दे चुका है. अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ पाकिस्तान आये ज्वाइंट चीफ आफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन और अन्य अधिकारी भी इस बात की हामी भर रहें हैं अमेरिका अल-कायदा और अन्य चरमपंथियों से लड़ने को पाकिस्तान की मदद चाहता है. हिलेरी का विशेष अनुरोध क्या होगा पता नहीं, लेकिन अगर विश्लेषकों की मानें तो हिलेरी वहीं पुराना राग अलापेंगी की अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान  का सहयोग चाहता है, इसके अलावा अमेरिका पाकिस्तान से उच्च वर्ग से कर वसूली की दिशा में विशेष कदम  उठाने के लिए कहता रहा है गौरतलब है की अमेरिका हर साल पाकिस्तान को तीन अरब डालर से ज्यादा की वित्तीय मदद देता है. 
हिलेरी की यात्रा से ठीक एक दिन पहले पेंटागन पाकिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या में कमी करने को राजी हो गया था, अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस समय पाकिस्तान में २०० से ज्यादा अमेरिकी सैनिक हैं जो पाकिस्तानी सेना को प्रशिक्षित कर रहें हैं, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों के हस्तक्षेप के तुरंत बाद जिस तरीके से पाकिस्तान में अपने सैनिकों की संख्या कम करने को मान जाना और फिर हिलेरी की यात्रा कोई बड़ा समधियाना ही लगता है. 
(ये आलेख विभिन्न समाचार माध्यमों के द्वारा प्रदत्त जानकारियों पर एक विश्लेषण है)
आलेख: आशुतोष पाण्डेय 



शुक्रवार, 20 मई 2011

अभी तो काव्य का सोता फूटा ही है: वन्दना गुप्ता

"जो मन में आता है लिख देती हूँ भाषा और शैली के पाश में कविता को बाधना नहीं चाहती, जो देखती हूँ महसूस होता है उसके लिए अनायास ही शब्द बन जातें हैं", ये उदगार हैं .... श्रीमती वन्दना गुप्ता के. वन्दना पिछले कई सालों से कविता और साहित्य की अन्य विधाओं में लिख रही हैं, लेकिन उनके काव्य की मोहकता मन को बरबस आकृष्ट कर लेती है.... भाषा और शैली के पाश में न बधने के कारण ही उनके काव्य में रहस्यवाद की गूढता, भक्तिकाल की शालीनता, श्रृंगार की मोहकता और प्रगतिशील काव्य की प्रगतिवादी रोमांचकता की झलक खुल कर दिखती है, उनके काव्य की विशेषता मानवीय मनोभावों में उनकी गहरी पकड़ है. प्रकृति और मानवीय मनोभावों का सामंजस्य किसी भी समीक्षक के लिए परेशानी पैदा कर देता है.. कई बार लगता है की वन्दना सूफी विचारधार से प्रेरित लगती हैं तो कई बार खुल कर वर्तमान उपादान का दोहन करती भी प्रतीत होती हैं . लिखने के लिए उन्होंने सोशियल नेटवर्किंग का सहारा लिया, काफी नाम भी कमाया है, आज हिंदी में लगातार ब्लोगिंग करती हैं, एक ही ब्लाग में उनकी २५० से ज्यादा कवितायें हैं, दिन दुनिया और साहित्यिक सरोकारों से बेखबर लगने वाली वन्दना दिल्ली के आदर्श नगर में रहती हैं, पेशा गृहणी, शौक लेखन, शिक्षा स्नातक बस इतना सा परिचय है, काव्य की इस चितेरी का. ये पूछने पर की उनकी रचनाएं किससे प्रभावित हैं' एक सपाट सा जवाब आता है जो दिल में आया लिख दिया, सोचती नहीं हूँ, क्या लिखना है? शायद यही कारण है उनकी रोज एक दो नयी कविता पढने को मिलती हैं. अगर उनकी सारी कविताओं को एक साथ रख दिया जाय तो एक महाकाव्य तैयार हो जाए लेकिन अभी तक साहित्य की कसौटी पर कविताओं की समीक्षा ना हो पाने के कारण ही उपेक्षित हैं. कविता के वर्त्तमान उपादानों पर कविता की व्याख्या करें तो उन्मुक्त भाषा का प्रयोग उनकी कविताओं आम आदमी की पसंद बनाता है, लेकिन जो कवितायेँ रहस्यवाद के पुट में हैं उनका सौंदर्य तो देखने के लायक है, हाँ हो सकता है की आम पाठक को वो समझ ना आयें या फिर वह उसे कसौटी पर कस न पाए. कुछ कवितायेँ जरूर निरन्तरता के अभाव में रची प्रतीत होती हैं लेकिन मनोभावों के चित्रण में लेखन की निरंतरता अक्सर बाधित हो ही जाती है. मनुष्य जीवन के लगभग सभी पहलूँ पर कवितायें लिख चुकी वन्दना मानती हैं की अभी तो काव्य का सोता फूटा ही है बस. प्रकाशन के सवाल पर मुस्कराते हुए जवाब देती हैं, "कोई छाप देता है तो ठीक है, मेरा काम है लिखना शेष मेरा कान्हा जाने". कृष्ण भक्तिधारा की कुछ कविताओं में वन्दना मीरा बन जाती हैं. बस बिंदास वन्दना लिखती जाएँ तो अच्छा लगता है.

(ये आलेख हमारी वन्दना जी से हुयी बातचीत और उनकी कविताओं की समीक्षा पर आधारित है. जल्द ही ही हम मूल साक्षात्कार को प्रकाशित करेंगें .)
आलेख: आशुतोष पाण्डेय

भारत फिर से विदेशी उपनिवेश न बन जाए

फिरोज अब्दुल रशीद खान
पी. चिदम्बरम
यूपीए सरकार का बुरा वक्त ख़त्म होता नजर नहीं आ रहा है... एक -आध राज्यों राज्यों में विधान सभा चुनावों के नतीजों पर इतरा रही सरकार आज फिर सी बी आई और आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के आला अधिकारियों की कारगुजारियों से शर्मसार हो गई है, पाकिस्तान को भेजे ५० मोस्ट वांटेड की सूची का एक आतंकी तो मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद है, १९९३ में मुंबई बम काण्ड में संलिपत्ता के चलते फिरोज अब्दुल रशीद खान उर्फ़ 'हमजा' के खिलाफ १९९४ में इंटरपोल के द्वारा रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया था. उसके बाद पिछले साल २०१० फरवरी में इसे नवी मुंबई से सी बी आई द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था और तभी से ये आर्थर रोड जेल में बंद है, लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद ही सीबीआई के द्वारा अभी तक रेड कार्नर नोटिस वापस नहीं लिया गया. अब हद तो तब हो गई जब इस आतंकी का नाम ५० मोस्ट वांटेड की सूची में पाकिस्तान को भेज दिया गया, किसने ये सूची तैयार की? उसकी जाँच क्यों नहीं की गयी? गृहमंत्रालय ने भी इसे भेजने से पहले जांच करना जरूरी क्यों नहीं समझा? अब एक सीबीआई इन्स्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया है और एक डी एस पी का ट्रांसफर कर दिया गया, अब गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने सीबीआई और आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के आला अधिकारियों को झाड़ लगाईं है, लेकिन इतने बड़े मुद्दे पर चिदम्बरम साहब की पूर्व अनभिज्ञता समझ से परे है, इससे पहले भी एक आतंकी बजुहल खान को को लेकर सीबीआई की लापरवाही सामने आयी थी जिसे पाकिस्तान में कहा जा रहा था वह मुंबई थाणे में था. अब तमाम प्रकार की सफाई मंत्रालय के द्वारा और सीबीआई के द्वारा डी जायेगी, लेकिन इस देश में आज कोई भी सुरक्षित नहीं है, जब हमारी सुरक्षा एजेंसियों को जेल में बंद अपराधियों की जानकारी नहीं है तो खुले घूम रहे आतंकवादियों की जानकारियाँ क्या ख़ाक होंगी? आज जब हम इस देश के हालात देखें तो सच सामने आ जाता है, पहले घोटाले दर घोटाले अब सुरक्षा एजेंसियों की ये लापरवाही, कहीं इस देश को बेचने की साजिश तो नहीं चल रही है, इस देश के आंतरिक हालात इतने खराब कर दियें जाएँ की अमेरिका जैसे किसी देश को हस्तक्षेप करना पड़े और भारत फिर से विदेशी उपनिवेश न बन जाए. 
 आलेख: आशुतोष पाण्डेय

नेत्र दान, महादान

नेत्र दान महादान, आपकी एक प्रतिज्ञा दो लोगों की जिन्दगी में रंग भर सकता है। आपकी नेत्रदान की इच्छा दुनिया को एक नई राह दिखायेगी। आइये मिलकर एक शपथ लें दो लोगों की जिन्दगी में रंग भरने की। इनसाईट स्टोरी नेत्रदान को एक अभियान के रूप में चलाना चाहता है। हमारी सारी टीम के सदस्य एक साथ नेत्रदान की घोषणा कर रहें हैं अन्धता-निवारण के लिए कार्य कर रहे कई संगठनों  और इनसाईट स्टोरी टीम की जागरूकता के साथ आप भी किन्ही दो लोगों को रोशनी प्रदान करने की शपथ लें। इस संदर्भ में आपकी सहायता के लिए इनसाईट स्टोरी टीम हर समय तैयार हैं। आप अधिक जानकारी के लिए इमेल के जरिये जानकारी ले सकतें हैं।
हमारा ईमेल पता: editor.insight@hotmail.com 
आप नेत्र दान का प्रतिज्ञा फार्म यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं।

सोमवार, 16 मई 2011

अंधेर नगरी चौपट राजा

हाल में कुछ राज्यों में हुए उपचुनावों ने देश की राजनीतिक तस्वीर को किसी हद तक साफ़ कर दिया है, देश की जनता भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा मानने को तैयार नहीं है, कांग्रेस समर्थित तृणमूल कांग्रेस का पश्चिमी बंगाल में अभूतपूर्व बहुमत और जयललिता की तमिलनाडु में वापसी इस दावे को सच ठहराती है, और कही ना कही आज अन्ना और रामदेव के भ्रष्टाचार की हवा निकाल रहें हैं. अब बड़ा सवाल यह है की अन्ना और रामदेव सही हैं या फिर जनता? क्या हुआ भ्रष्टाचार के खिलाफ खादी जनता एकाएक भ्रष्टाचारियों की समर्थक कैसे बन गयी, दरअसल सच कहें तो ये पब्लिक है सब जानती है.... आज सेलिब्रेटी बनने का शौक अन्ना या नेताओं को है उतना ही आम जनता को भी है.... इस लिए अन्ना को समर्थन देने वाले भी, ज़रा बताएं वोट किसको दिया. 
जनता ने जो किया उसका अपना मापदंड है, अगर वह गुजरात में नरेन्द्र मोदी को जिताती है तो, वही बुद्धदेव अपनी सीट भी नहीं बचा पते हैं, जनता का वोट लोकपाल या विदेश नीति को नहीं मिलता उसका वोट तो खालिश विकास को जाता है, वो भले मोदी करें या नितीश कुमार. अब बात करें उत्तराखंड की जहां इस समय बीजेपी की सबसे अलोकप्रिय सरकार काबिज है, बीजेपी सत्ता की कमान खंडूरी से छीन कविवर निशंक को दे चुकी है लेकिन यहाँ तो अंधेर नगरी चौपट राजा वाली बात हुई, राज्य का विकास तो छोडिये, विनाश करने में कसार नहीं छोडी है इस सरकार ने, ये दावा हमारा नहीं हैं, ये जनता की ही आवाज है, जिसमें वो पूछ रही है कितने बेरोजगारों को नौकरी मिली, वो आपकी एक योजना थी अनाज मिल रहा था... कहाँ लागू है वो, एक यूनिट पर २५० ग्राम चीनी, बिजली की १० घंटे कटौती, निरंकुश नौकरशाही, ये सब क्या है? ये नतीजे हैं हमारी इनसाईट स्टोरी टीम के द्वारा किये गए एक रेंडम सेम्पल सर्वे का, जिसके सभी नतीजे एक दो दिन में आपको मिल जायेंगे, जनता ने जहा पूरे कार्यकाल के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार को १० में से ६.८ दिए हैं वहीं वर्तमान भाजपा सरकार को मात्र ३.७ अंक दिए हैं. 
(आशुतोष पाण्डेय और टीम)

शनिवार, 14 मई 2011

इनसाईट स्टोरी: देश की खबर कानों कान ....

इनसाईट स्टोरी: देश की खबर कानों कान ....: "(रोना आता है... ये हालत देख) ये चंद महीने भारतीय राजनिती में जबरदस्त बदलाव के लिए जाने जायेंगे, पहले घोटाले- २ जी, कामनवैल्थ और तमाम उसके..."

देश की खबर कानों कान ....

(रोना आता है... ये हालत देख)
ये चंद महीने भारतीय राजनिती में जबरदस्त बदलाव के लिए जाने जायेंगे, पहले घोटाले- २ जी, कामनवैल्थ और तमाम उसके बाद अन्ना का आन्दोलन.....फिर अन्ना का मोदी की तारीफ़, भूषण परिवार को लेकर लोकपाल समिति पर हंगामा, उसके बाद लादेन का संहार और अब पश्चिमी बंगाल में लाल झंडे का सफाया. इस बीच में नोयडा में किसान आन्दोलन और पुलिस वालों की मौत. इसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है? जिसकी चर्चा करें, ममता की ताजपोशी या फिर कलमाडी और राजा की जेल यात्रा, देखिये हमें ना अपनी टी आर पी बढ़ानी या विज्ञापनों का लोचा, तो सुनिए जो घोटाले हुए मुझे कुछ नहीं मिला, अन्ना का आन्दोलन एक दिन मैंने भी मिस काल मार कर समर्थन किया था, फिर अन्ना साहब ने कहा मोदी साहब सर्वश्रेष्ठ हैं....... भाई अन्ना कहिन...... तो होगा मोदी. अच्छा.... बाद में पता चला ये मोदी अपने गुजरात के ...... नरेन्द्र मोदी हैं (अरे वो ही गोधरा कहीं ...नाम आया था)...... फिर मालूम हुआ की देश में एक भूषण परिवार रहता है जिसके पास इस देश के दो इकलौते कानूनविद हैं तभी तो दोनों को लोकपाल समिति  में लेना मजबूरी थी...... अब लादेन को मार डाला अमेरिका ने लाश कहीं डूबा दी सुनने में आया था, ना मैंने देखा ना अमेरिकी सीनेट ने... खैर यहाँ ओबामा जी बोले तो मानना पड़ा..... लेकिन अपने देश मैं देखो....आतंकवादी तो धरोहर हैं...... अफजल गुरू को कितना संभाल कर रखा है इस देश ने... लादेन पागल था पाकिस्तान में जा छिपा इंडिया में आ जाता बासमती मिलते खाने को...... फासी तो दूर कुछ समय बाद संत बन जाता. अब बारी नोयडा के किसान आन्दोलन की..... दो पुलिस वालों की मौत..... जिला अधिकारी और पुलिस अफसर गोली खा गए, फिर युवराज (क्रिकेट वाला नहीं, राजनिती वाला) राहुल गांधी धरने पर बैठ गए, मीडिया बोली सारी सुरक्षा व्यवस्था को धता बता कर राहुल गाँव पहुचें, हंसी आयी मीडिया की अक्ल पर, यार.. यूपी में सुरक्षा व्यवस्था जैसी कोई चीज होती तो किसान यूं अवैध हथियारों से फायर  नहीं झोकते, और राहुल जी कह गए उन्हें भारतीय होने पर शर्म आती है..... हम कहतें हैं भाई अगर ऐसा है... तो इटली चले जाओ ... ननिहाल.... 
आज फिर ममता जी की ताज पोशी, ३४ साल पुराना कम्युनिस्ट गढ़ ढह गया..... और ममता की सादगी.... सारा श्रेय सोनिया जी को दे डाला...... क्योंकि अभी रेल मंत्रालय का सवाल भी है.... सोनिया जी को खुश रखना जरूरी है...... अभी आने वाले चंद महीनों में बहुत कुछ होना बाकी है..... लेकिन क्या होगा..... अभी एक बात अपने वो समाजवादी वाले थे अमर बाबू ...... उनके कुछ टेप सार्वजनिक होने हैं......
सुनने में आ रहा है.. उत्तराखंड के कवि ह्रदय निशंक जी का विकल्प भी तलाशा जा रहा है...... क्योंकि सड़कें.... स्कूल, अस्पताल, विभाग सब निरंकुश हो गए हैं. 
अंत में जो हुआ या होगा, हमें तो भारत माँ को नमन करना ही है...... माँ तुझे सलाम........
 (आशुतोष पाण्डेय)


सोमवार, 9 मई 2011

हमारी उच्च शिक्षा का काला सच

एक मई २०११ को सम्पन ए आई ईईई की परीक्षा में पेपर लीक होने के बाद उसी दिन फिर परीक्षा करवाई गयी थी, पेपर कैसे लीक हुए या कराये गए, ये सवाल के बारे में बाद में बात करेंगे, अभी जो प्रमुख सवाल है वह एक योग्यता मेरिट लिस्ट के लिए दो परीक्षाएं करवाने का है, ए आई ईईई प्रबंधन ११ मई को फिर से उन छत्रों को परीक्षा देने का मौका दे रहा, जो १ मई को इससे वंचित रह गए थे, लेकिन एक मेरिट के लिए दो परीक्षाएं, ये कहीं ना कहीं छात्रों के समानता के हक़ को प्रभावित कर रहा है, इस फैसले पर रोक लगाने के लिए एनआईटी जमशेदपुर के पूर्व प्रोफेसर ए. पी. सिन्हा ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस निर्णय के विरोध में दायर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर , की है जिसमें हाईकोर्ट ने सरकार को मामले में नोटिस तो जारी किया था, लेकिन ११ मई को उसके दोबारा परीक्षा कराने के फैसले को रोकने से इंकार कर दिया था।  याचिका में मांग की गयी है कि १ मई को कराई  गयी परीक्षा को निरस्त कर नए सिरे से सभी विद्यार्थियों को सामान रूप से प्रदर्शन का मौका मिलना चाहिए, पर कई बार पेपर लीक होने के बाद ऐसी स्थितियां अक्सर पैदा होती हैं, लेकिन कोई ठोस कदम इस बाबत नहीं उठाये जातें हैं जिसके चलते, पेपर लीक होने से रोका जा सके, और बिना उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के ये सब संभव कैसे हो सकता है, ये यक्ष प्रश्न है? 
इस समय देश में कोचिंग माफियाओं की बाढ़ सी आ गयी है, इसमें से कई तो १०० फीसदी सफलता की गारंटी देतें हैं, और कई बार प्रवेश परीक्षाओं की मेरिट देखकर लगता भी है की, दाल में कुछ काला है, इतना ही नहीं इस हद तक फिक्सिंग देखने को मिलती है की मनचाहे कालेज में एडमीशन की गारंटी तक ये कालेज दे देतें हैं. 
शिक्षा के नाम पर हो रही तमाम फिक्सिंग हर स्तर पर हर जगह मिलती है, फर्जी मार्कशीट, प्रमाण पत्र, डिग्री, क्या नहीं मिलता है, शिक्षा के इन माल्स में. इसके अलावा आज तमाम प्राइवेट कालेज भी कोई कम प्रदूषण नहीं फैला रहें हैं, पैसा दो मन चाहे कोर्स में एडमीशन लो, लाखों रूपया ऐठने वाले ये कालेज मानकों की खुले आम धज्जियां उड़ा रहें हैं, क्या ये ही है, हमारी उच्च शिक्षा का काला सच? 

(आशुतोष पाण्डेय )

गुरुवार, 5 मई 2011

जनता को भ्रष्ट मत कहना ......

ब्लाग, अपनी मर्जी से कुछ भी लिखने का एक मंच। यहाँ कोई अपनी भडास निकालता है तो कोई अपनी अभिव्यक्ति को आवाज देता है। कोई और मेरी सुने या ना सुने अब में कह सकता हूँ। भले ही में एक स्टार न बन सका फ़िर भी स्टार ब्लागर बनने का ख्वाब तो पूरा कर ही लूँ। खैर जाने भी दो यारों दो -चार गिले शिकवे तो कर लें। आजकल हमारे देश में दो मुद्दे बेहद गर्म हैं......... पहला तो जनता की कमर तोड़ रहा है दूसरा यू पी ए सरकार की चूलें हिला रहा है। महंगाई क्या कहने इसका विकास सबसे ज्यादा हुआ........ दूसरा भ्रष्टाचार........ इसका हल्ला सबसे ज्यादा हुआ...... दोनों में से कम क्या हुआ? तो एक ही जवाब है गरीब की रोटी, वैसे भी हमारी सरकार की अध्यक्ष महोदया तो पिज्जे वाली हैं....... और देश के प्रधानमंत्री महोदय को पेंशन मिलती ही होगी, इन के लिए तो रोटी कोई बात नहीं, हर कह रहा है में चोर नहीं, वो चोर है.......... जय-जय इन चोरों की. कुछ चोर खुश हैं की ओसामा मारा गया ......... कुछ पवन हंस से कमीशन खाने में. इनकी भी जय हो. कुछ काले  धन पर नजर गड़ाएं हैं की कब आये और कब दान मांगे एसी काटेज बनाने है, बड़े योग करने वालों के लिए, जय हो बाबा रामदेव की उन्होंने हमारे भ्रष्ट नेताओं को योग सिखा दिया, अब नेता चंगे हैं और जोरों से लूट रहें है....... राजा हो या अपने कलमाडी जी, सब मस्त हैं, जानते हैं योग में काफी ताकत है...... ये योग ही तो था जिसके चलते इतना कमा लिया, ऐसे योग सब को नहीं मिलते क्योंकि कामनवैल्थ गेम रोज नहीं होते.......... और देखिये .......... योग संयोग ......... जनता को मिल गई फेशबुक वो उसमें खुश ......... बुद्धिजीवी वाल, पोस्ट, कमेन्ट के जंजाल में, जय जय जय हो भाग्य विधाता जनता की, अरे ये क्या कर दिया जनता के ऊपर टिप्पणी, इस देश की जनता पर टिपण्णी ना बाबा ना! ........... ? अब सोच लो ...... ये लोक तंत्र है केवल जनता सरकार को भ्रष्ट कहेगी, जनता को कोई कुछ मत कहना ......... ये है जनता योग!

रविवार, 1 मई 2011

2 जी घोटाले: नया घमासान शुरू



भाजपा और कांग्रेस के बीच 2 जी घोटाले पर लोक लेखा समिति कि रिपोर्ट को लेकर नया घमासान शुरू: 
मुरली मनोहर जोशी ने रिपोर्ट को लोक सभा अध्यक्ष के पास भिजवा दिया है और अध्यक्ष से ये आग्रह किया है कि इस रिपोर्ट को मंज़ूर करें. रिपोर्ट लोक सभा अध्यक्ष के पास भिजवाने के बाद जोशी ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि समिति में कांग्रेस सदस्यों ने केंद्रीय मंत्रियों के दिशा निर्देशों पर काम करते हुए हंगामा किया. उन्होंने कहा, "समिति में रिपोर्ट का विरोध करने वाले यूपीए से संबंधित संसद सदस्यों के पास पर्चियाँ आ रही थीं." जोशी ने चिदम्बरम के बयानों से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्ही की और संकेत कर कहा, "जो मंत्रिगण समिति के सदस्यों को कठपुतलियों की तरह नचा रहे थे उनका नेतृत्व कौन कर रहा था?".
समिति के सदस्यों के रिपोर्ट को खारिज करने के प्रश्न पर उन्होंने कहा ये असंवैधानिक है. मत विभाजन पर उन्होंने कहा ये किसकी अनुमति से हुआ? उन्होंने कहा, "मामले का राजनीतिकरण न करें. रिपोर्ट का विरोध करने का सबको अधिकार है लेकिन दलगत आधारों पर पीएसी का कामकाज नहीं चल सकता. भ्रष्टाचार का समर्थन करने वाली सरकार ज़्यादा दिन नहीं टिकेगी. हमारी अपेक्षा है कि ये रिपोर्ट संसद में पेश हो." इस रिपोर्ट को लेकर हाल के दिनों में पीएस की बैठक में जमकर हंगामा हुआ है.  दरअसल मीडिया में इस रिपोर्ट के मसौदे के लीक होने की ख़बर पर विवाद खड़ा हो गया था. लीक रिपोर्ट में 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और ख़ुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी कई सवाल उठाए गए हैं.
(आशुतोष पाण्डेय)