देश में जहां आई आई टी की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहें हैं वहीं दूसरी ओर प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेजों की भरमार देखने को मिल रही है, जब आई आई टी अपनी गुणवत्ता के मानक पर खरी नहीं उतर रही है तो इन इंजीनियरिंग कालेजों का क्या कहना? एक समय महानगरों तक सीमित ये प्राइवेट कालेज शहरों और कस्बों तक में खुल चुके हैं. विज्ञापन में सबसे उत्कृष्ट होने का दावा करने वाले कालेजों के पास एसी क्लास रूम और वाई फाई कनेक्टिविटी भले ही हो लेकिन अगर शैक्षणिक माहौल की बात करें तो ये शिफर नजर आतें हैं, इन कालेजों में लैब का तो सर्वथा अभाव ही दिखता है. तो फिर कैसे चल रहें हैं ये कालेज? दरअसल इन कालेजों में एडमिशन लेने वाले काफी बाद की रैंकिंग वाले वो छात्र हैं जो सरकारी कालेजों में प्रवेश नहीं ले पाए और वे इसे आशीर्वाद मान लेतें हैं. मनचाही फीस वसूलने वाले इन संस्थानों में फैकल्टी की भारी कमी है, और यू जी सी के मानकों को तांक पर रख मात्र बी. टेक.या एम. टेक योग्यता वाले अध्यापक इनका काम चला रहें हैं. इसके अलावा कुछ विजिटिंग फैकल्टी के नाम पर ये छात्रों को बेवकूफ बना ही लेते हैं और ये विजिटिंग भी महज साल में एक या दो क्लास ही लेतीं हैं. इस प्रकार इंजीनियर बनाने के ये कारखाने चल पड़ें हैं. अब सवाल ये है की ये तैयार इंजीनियरों की फसल कैसी होगी? और ये देश के विकास में क्या योगदान कर पायेंगे? ये कुछ ऐसे यक्ष प्रश्न हैं जिनका उत्तर भले ही हमारी व्यवस्था के पास ना हो लेकिन इन्हें नजर अंदाज कर पाना भी इतना आसान नहीं होगा. कल जब ये इंजीनियर देश की मुख्या धारा मेंशामिल होंगे तो क्या करेंगे. अगर इनके बनाए पुल गिरने लगे, पटरियां उखड़ने लगें और घर जान लेने लगें तो... दोष किसके सर मढ़ा जाएगा. इस व्यवस्था को या फिर जनता की किस्मत को जो इसकी शिकार बनेगी.
भाजपा और कांग्रेस के बीच 2 जी घोटाले पर लोक लेखा समिति कि रिपोर्ट को लेकर नया घमासान शुरू:
मुरली मनोहर जोशी ने रिपोर्ट को लोक सभा अध्यक्ष के पास भिजवा दिया है और अध्यक्ष से ये आग्रह किया है कि इस रिपोर्ट को मंज़ूर करें. रिपोर्ट लोक सभा अध्यक्ष के पास भिजवाने के बाद जोशी ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि समिति में कांग्रेस सदस्यों ने केंद्रीय मंत्रियों के दिशा निर्देशों पर काम करते हुए हंगामा किया. उन्होंने कहा, "समिति में रिपोर्ट का विरोध करने वाले यूपीए से संबंधित संसद सदस्यों के पास पर्चियाँ आ रही थीं." जोशी ने चिदम्बरम के बयानों से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्ही की और संकेत कर कहा, "जो मंत्रिगण समिति के सदस्यों को कठपुतलियों की तरह नचा रहे थे उनका नेतृत्व कौन कर रहा था?".समिति के सदस्यों के रिपोर्ट को खारिज करने के प्रश्न पर उन्होंने कहा ये असंवैधानिक है. मत विभाजन पर उन्होंने कहा ये किसकी अनुमति से हुआ? उन्होंने कहा, "मामले का राजनीतिकरण न करें. रिपोर्ट का विरोध करने का सबको अधिकार है लेकिन दलगत आधारों पर पीएसी का कामकाज नहीं चल सकता. भ्रष्टाचार का समर्थन करने वाली सरकार ज़्यादा दिन नहीं टिकेगी. हमारी अपेक्षा है कि ये रिपोर्ट संसद में पेश हो." इस रिपोर्ट को लेकर हाल के दिनों में पीएस की बैठक में जमकर हंगामा हुआ है. दरअसल मीडिया में इस रिपोर्ट के मसौदे के लीक होने की ख़बर पर विवाद खड़ा हो गया था. लीक रिपोर्ट में 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और ख़ुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी कई सवाल उठाए गए हैं.
(आशुतोष पाण्डेय)























